
ऑपरेशन थिएटर से उठी मौत की चीख, अस्पताल में मचा हड़कंप — कार्रवाई की मांग तेज
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। कसया स्थित एक निजी अस्पताल में गाल ब्लैडर ऑपरेशन के बाद महिला की संदिग्ध मौत ने स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था, निजी अस्पतालों की जवाबदेही और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। इलाज कराने पहुंची महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया और परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।
मामला कसया नगर पालिका परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या-4 का बताया जा रहा है, जहां की निवासी नर्गिस पत्नी तसलीम गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। परिजनों के मुताबिक बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हें कसया के पुरानी फाजिलनगर रोड स्थित लूना अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी और मरीज को भर्ती कर लिया।

आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार चिकित्सकों और अस्पताल स्टाफ को स्थिति से अवगत कराया, लेकिन समय रहते न तो गंभीरता दिखाई गई और न ही समुचित चिकित्सकीय प्रबंधन किया गया। देखते ही देखते हालत और बिगड़ती चली गई और आखिरकार महिला ने दम तोड़ दिया।
मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिजनों के आंसू आक्रोश में बदल गए और देखते ही देखते भारी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर गलत इलाज, लापरवाही और मरीज की वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाया। काफी देर तक अस्पताल परिसर तनाव और अफरा-तफरी का केंद्र बना रहा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मौके पर मौजूद लोग लगातार जवाब मांगते रहे, लेकिन अस्पताल प्रशासन सफाई देने और मामले को संभालने में लगा रहा। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने परिजनों को निष्पक्ष कार्रवाई और जांच का भरोसा दिलाया तथा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

घटना के दूसरे दिन राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। समाजवादी पार्टी नेता बंटी राव ने मृतका के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि चिकित्सकीय लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन ने स्वयं पर लगे आरोपों को निराधार बताया है। अस्पताल पक्ष का दावा है कि मरीज का उपचार चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप किया गया तथा उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए। हालांकि परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन के दावों के बीच सच क्या है, इसका स्पष्ट जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
लेकिन इस घटना ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या निजी अस्पतालों में ऑपरेशन और गंभीर उपचार के लिए आवश्यक मानक पूरे किए जा रहे हैं? क्या स्वास्थ्य विभाग नियमित निरीक्षण और निगरानी कर रहा है? आखिर इलाज के नाम पर संचालित संस्थानों की जवाबदेही तय कौन करेगा?
जनपद में पूर्व में भी निजी अस्पतालों की कार्यशैली को लेकर शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अक्सर फाइलें ही दौड़ती नजर आई हैं। ऐसे में नर्गिस की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी मानी जा रही है।
अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई तथ्य सामने आ सकते हैं, लेकिन यदि मामला सिर्फ कागजी औपचारिकताओं में दब गया तो मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल और गहरे होंगे।
