
कागजों में सफाई, जमीनी हकीकत में सन्नाटा; ग्रामीणों ने उठाए योजनाओं की निगरानी पर सवाल
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
दुदही, कुशीनगर। केंद्र और प्रदेश सरकार जहां स्वच्छ भारत मिशन को जनआंदोलन बनाने में जुटी हैं, वहीं कुशीनगर जनपद के दुदही विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा बिशनपुर बरिया पट्टी के टोला चौसज में लाखों रुपये की लागत से निर्मित कूड़ा कचरा प्रबंधन केंद्र बीते लगभग तीन वर्षों से ताले में बंद पड़ा है। जिस भवन से गांव की स्वच्छता व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद थी, वह आज उपेक्षा, लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बनकर खड़ा दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इस केंद्र का कभी नियमित संचालन शुरू ही नहीं किया गया। परिणामस्वरूप गांव में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था विकसित नहीं हो सकी और स्वच्छता अभियान के बड़े-बड़े दावे केवल कागजों तक सीमित होकर रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि जिस परियोजना पर सरकारी धन खर्च किया गया, वह जनता के उपयोग में आए बिना ही शोपीस बन गई है।
मौके की स्थिति भी कई सवाल खड़े करती है। भवन के आसपास झाड़ियां उग आई हैं, परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है और रखरखाव के अभाव में संरचना धीरे-धीरे जर्जर होती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इसका संचालन शुरू कर दिया गया होता तो गांव की गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर कचरा प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था स्थापित हो सकती थी।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत के लिए खरीदे गए दो कूड़ा संग्रहण वाहन भी प्रभावी उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ये वाहन अधिकांश समय खड़े रहते हैं और नियमित कचरा संग्रहण की व्यवस्था कहीं दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों का आरोप है कि कभी-कभार औपचारिक रूप से वाहन चलाकर जिम्मेदारियां पूरी होने का संदेश देने का प्रयास किया जाता है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनका लाभ जनता तक पहुंचना भी उतना ही आवश्यक है। यदि करोड़ों और लाखों रुपये की योजनाएं ताले में बंद रहें तो यह न केवल संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, पंचायती राज विभाग और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर तीन वर्षों से केंद्र बंद क्यों पड़ा है, संचालन में क्या बाधा है और सरकारी धन से निर्मित परिसंपत्तियों का लाभ जनता तक क्यों नहीं पहुंच पाया।
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या यह बंद पड़ा केंद्र फिर से स्वच्छता मिशन का आधार बनेगा या फिर सरकारी फाइलों में विकास की एक और अधूरी कहानी बनकर रह जाएगा।
