
अपने छोटे-छोटे सपनों की बचत तक दान करने को तैयार अकरम शेख, डीएम से राहत कोष में धनराशि जमा कराने की भावुक अपील
कुशीनगर। विशेष संवाददाता, विलेज फास्ट टाइम्स। इंसानियत की कोई उम्र नहीं होती और संवेदना के लिए बड़े होने का इंतजार भी नहीं करना पड़ता। कुशीनगर के एक महज 6 वर्षीय मासूम अकरम शेख ने यह बात अपनी छोटी उम्र लेकिन बड़ी सोच से साबित कर दिखाई है। नेपाल में आई बाढ़ की त्रासदी और पीड़ित परिवारों का दर्द देखकर इस नन्हे बच्चे का बाल मन इतना व्यथित हुआ कि उसने अपनी गुल्लक में जमा की गई पूरी धनराशि बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए समर्पित करने का फैसला कर लिया। यह संवेदना न केवल सराहनीय है, बल्कि समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा भी है।
ग्राम व पोस्ट बेतिया, थाना व तहसील पडरौना, जनपद कुशीनगर निवासी अकरम शेख पुत्र इमरान अली सिद्दीकी ने इस संबंध में जिलाधिकारी कुशीनगर को प्रार्थना पत्र देकर अपनी इच्छा जाहिर की है। अपने प्रार्थना पत्र में मासूम अकरम ने नेपाल में आई बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त करते हुए अपनी गुल्लक की पूरी जमा धनराशि राहत कार्यों में देने की इच्छा जताई है।
बताया गया कि अकरम बीते कई दिनों से टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से नेपाल में बाढ़ की भयावह तस्वीरें और पीड़ितों की परेशानियां देख रहा था। बाढ़ से उजड़े परिवार, संकट में फंसे लोग और जरूरतमंदों की पीड़ा ने उसके मन को झकझोर दिया। जिस उम्र में बच्चे अपनी गुल्लक में जमा पैसों से खिलौने, मिठाइयां या अपनी पसंद की चीजें खरीदने के सपने देखते हैं, उसी उम्र में अकरम ने उन पैसों को मुसीबत में फंसे अनजान लोगों की मदद के लिए देने का संकल्प लिया।
अकरम ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि उसकी गुल्लक में जमा धनराशि को स्वीकार कर प्रशासन के माध्यम से उचित राहत कोष में जमा कराया जाए, ताकि बाढ़ की मार झेल रहे जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंच सके। मासूम की यह पहल रकम के आकार से कहीं अधिक उसके विशाल हृदय और मानवीय सोच को दर्शाती है।
आज जब समाज में कई लोग अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेते हैं, ऐसे समय में 6 साल के बच्चे द्वारा दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझना निश्चित रूप से मानवता का मजबूत संदेश है। अकरम ने साबित कर दिया कि मदद करने के लिए करोड़ों रुपये नहीं, बल्कि दूसरों के प्रति सच्ची संवेदना और नेक इरादा होना जरूरी है।
यह पहल समाज के हर व्यक्ति के लिए सोचने का विषय भी है और प्रेरणा भी। छोटी सी गुल्लक, छोटी सी उम्र, लेकिन मदद करने का जज्बा बेहद बड़ा—यही अकरम की संवेदना को खास बनाता है। विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर का मानना है कि इस मासूम की सराहनीय पहल को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि समाज में सेवा, सहयोग और इंसानियत की ऐसी भावनाएं और मजबूत हों।
वास्तव में, अकरम की गुल्लक में सिर्फ सिक्के और नोट नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और मदद का एक बड़ा संदेश छिपा है—जिसे समाज को जरूर सलाम करना चाहिए।
