
ऑडिट से लेकर विद्यालय निर्माण तक उठे सवाल, शिक्षिका को धमकाने का भी आरोप; शिकायतकर्ता ने मांगी मजिस्ट्रेटी जांच
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के बीच कुशीनगर के कसया शिक्षा क्षेत्र से सामने आई एक शिकायत ने बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार यादव के विरुद्ध खेलकूद प्रतियोगिता के नाम पर विद्यालयों से कथित धन वसूली, ऑडिट के नाम पर पैसे लेने, मध्याह्न भोजन (एमडीएम) रजिस्टर बेचने, शिक्षकों पर दबाव बनाने और विद्यालय भवन निर्माण में ठेकेदारों के हस्तक्षेप जैसे आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा से लेकर जिलाधिकारी कुशीनगर तक प्रार्थना पत्र भेजकर मामले की मजिस्ट्रेटी जांच कराने और आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
खेलकूद प्रतियोगिता या विद्यालयों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ?
शिकायत के मुताबिक, खेलकूद प्रतियोगिता के नाम पर कंपोजिट विद्यालयों से 1,000 रुपये और प्राथमिक विद्यालयों से 700 रुपये तक लिए जाने का आरोप है। सवाल यह है कि यदि विद्यालयों से धनराशि ली गई, तो इसके पीछे विभागीय आदेश क्या था? रकम किस मद में जमा हुई? क्या विद्यालयों को रसीद दी गई और उसका हिसाब सरकारी अभिलेखों में दर्ज है? बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं के नाम पर धन संग्रह की वास्तविकता अभिलेखों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
ऑडिट के नाम पर भी धन लेने का दावा
शिकायतकर्ता ने बीआरसी कार्यालय के सहायक चैतन्य मणि के माध्यम से ऑडिट के नाम पर भी कथित वसूली किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, कंपोजिट विद्यालयों से 1,000 रुपये और अन्य विद्यालयों से 500 रुपये तक लिए गए। यदि ऐसा हुआ है, तो धन लेने का अधिकृत आदेश, रसीद और जमा राशि का लेखा-जोखा जांच के दायरे में आना चाहिए। आखिर ऑडिट जैसी विभागीय प्रक्रिया के नाम पर धनराशि लेने की अनुमति किसने दी? इसका जवाब संबंधित अभिलेखों से मिलना चाहिए।
350 रुपये का एमडीएम रजिस्टर, व्यवस्था पर सवाल
शिकायत में बीआरसी कार्यालय से मध्याह्न भोजन का रजिस्टर 350 रुपये में उपलब्ध कराए जाने का आरोप भी लगाया गया है। अब सवाल उठता है कि रजिस्टर की आपूर्ति किस व्यवस्था के तहत हुई, उसकी कीमत किसने निर्धारित की और विद्यालयों से ली गई रकम की रसीद कहां है? विभाग को रजिस्टर की खरीद, वितरण और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
जांच रिपोर्ट रोककर दबाव बनाने का आरोप
शिकायतकर्ता का दावा है कि विद्यालयों के निरीक्षण के बाद जांच आख्या लगभग एक महीने तक लंबित रखी जाती है और कथित तौर पर शिक्षकों पर दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि अपेक्षित धनराशि नहीं मिलने पर रिपोर्ट जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय भेज दी जाती है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए निरीक्षण रजिस्टर, रिपोर्ट भेजने की तारीखों और संबंधित शिक्षकों के बयान की जांच जरूरी है। यदि विभागीय निरीक्षण का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए हुआ है, तो यह गंभीर प्रशासनिक मामला होगा।
भवन निर्माण में ठेकेदारी और शिक्षिका को धमकी देने का आरोप
शिकायत में विद्यालय भवन निर्माण के कार्यों में ठेकेदारों के जरिए काम कराने और निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी किए जाने का भी आरोप है। शिकायतकर्ता ने एक शिक्षिका को कथित रूप से डराने-धमकाने, प्रतिदिन मांस मंगवाने और ऐसा न करने पर विद्यालय की जांच कराने की धमकी दिए जाने का दावा भी किया है। इसके अतिरिक्त, बीआरसी से पुस्तकों की ढुलाई शिक्षकों से जबरन कराने और इनकार करने पर जांच की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। इन गंभीर आरोपों की सत्यता संबंधित व्यक्तियों के बयान, दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकती है।
अब जवाबदेही तय होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष मजिस्ट्रेटी जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना आवश्यक है।
अब निगाहें जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग पर टिकी हैं। क्या शिकायत के प्रत्येक बिंदु की निष्पक्ष जांच होगी? क्या कथित धन वसूली का हिसाब सार्वजनिक किया जाएगा? या फिर सरकारी विद्यालयों से जुड़े ये गंभीर सवाल विभागीय फाइलों तक सिमटकर रह जाएंगे? इन सवालों का जवाब जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से ही मिलेगा।
महत्वपूर्ण सूचना: समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी आवश्यक है। समाचार की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार यादव का पक्ष भी लिया जाना चाहिए। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। यदि संपर्क के प्रयास के बावजूद उनकी प्रतिक्रिया नहीं मिलती है, तो इसकी जानकारी समाचार में स्पष्ट रूप से दी जाएगी। विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर निष्पक्ष पत्रकारिता, जनहित और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि तथ्यों को सामने लाना है।
