
तरया सुजान/कुशीनगर। (विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता)।
कुशीनगर के तरया सुजान थाना क्षेत्र में बहादुरपुर पुलिस चौकी के पास ड्यूटी के दौरान एक पुलिसकर्मी को ट्रक से कुचलकर चालक के कथित तौर पर फरार हो जाने की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। गंभीर रूप से घायल सिपाही का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जारी बताया जा रहा है। घटना ने जहां पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, वहीं बालू की कथित अवैध ढुलाई और उस पर निगरानी रखने वाली व्यवस्था को लेकर भी कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि घटना के बाद पुलिस की पकड़ में आए ट्रक पर नंबर प्लेट नहीं थी। अगर यह तथ्य जांच में सही साबित होता है, तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर बिना नंबर प्लेट का भारी वाहन सड़क पर कैसे संचालित हो रहा था? वाहन के कागजात कहां थे? इसका वास्तविक मालिक कौन है? वाहन किसके नाम पंजीकृत है? और सबसे महत्वपूर्ण—यदि ट्रक किसी अवैध गतिविधि में इस्तेमाल हो रहा था तो उसकी निगरानी करने वाली संबंधित एजेंसियां अब तक क्या कर रही थीं?
बताया जा रहा है कि बहादुरपुर पुलिस चौकी क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान सिपाही इस घटना की चपेट में आया। ट्रक की चपेट में आने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि चालक मौके से फरार हो गया। घायल पुलिसकर्मी को तत्काल उपचार के लिए भेजा गया और बाद में गंभीर हालत को देखते हुए बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
यह घटना महज एक सड़क हादसा है या इसके पीछे कोई बड़ी कहानी छिपी है—इसका जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा। लेकिन घटना के बाद बिना नंबर प्लेट वाले ट्रक की बात सामने आना जांच का दायरा बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। पुलिस को केवल फरार चालक की तलाश तक सीमित न रहकर वाहन के स्वामित्व, कागजात, फिटनेस, परमिट, मार्ग और उसके पिछले संचालन की भी गहन जांच करनी होगी।
क्षेत्र में बालू के कथित अवैध कारोबार को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि दुर्घटना में शामिल ट्रक कहीं अवैध बालू परिवहन से तो नहीं जुड़ा था। यदि ऐसा कोई संबंध सामने आता है, तो फिर यह सवाल स्वाभाविक है कि बिना प्रभावी निगरानी के ऐसे वाहन लगातार सड़क पर कैसे दौड़ते रहे?
खनन विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
अवैध खनन और अवैध बालू परिवहन पर कार्रवाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। संबंधित खनन विभाग की निगरानी और कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक अवैध खनन या बालू की अवैध ढुलाई का नेटवर्क सक्रिय रहता है और पुलिस को बार-बार ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ती है, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस घटना का सीधा संबंध अवैध बालू कारोबार से है। लेकिन यदि जांच में ऐसा कोई कनेक्शन सामने आता है, तो पूरे नेटवर्क की तह तक जाना जरूरी होगा। वाहन चालक से लेकर मालिक, परिवहन के स्रोत, गंतव्य और कथित कारोबार से जुड़े अन्य लोगों तक जांच पहुंचनी चाहिए।
घायल सिपाही की हालत और उसके परिवार की चिंता इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू है। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी यदि किसी वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल होता है और चालक फरार हो जाता है, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती है। पुलिसकर्मियों के मनोबल और सुरक्षा से जुड़ा यह मामला है, इसलिए कार्रवाई भी उसी गंभीरता से होनी चाहिए।
अब निगाहें जनपद के जिलाधिकारी और पुलिस
अधीक्षक की कार्रवाई पर टिकी हैं। उम्मीद है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और वाहन के पीछे यदि कोई संगठित अवैध नेटवर्क सामने आता है तो उसकी भी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सवाल सिर्फ एक फरार चालक की गिरफ्तारी का नहीं है। सवाल यह भी है कि बिना नंबर प्लेट का ट्रक सड़क तक कैसे पहुंचा, उसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी और यदि वह अवैध बालू परिवहन में इस्तेमाल हो रहा था तो संबंधित विभागों की नजर उस पर क्यों नहीं पड़ी?
अब देखना होगा कि जांच की गाड़ी केवल मुकदमे और गिरफ्तारी तक रुकती है या फिर उसकी दिशा उस पूरे तंत्र तक पहुंचती है, जहां से कथित अवैध कारोबार को ताकत मिलती है। क्योंकि अगर कार्रवाई सिर्फ घटना के बाद शुरू होगी और व्यवस्था पहले से नहीं जागेगी, तो सवाल फिर वही रहेगा—अगली बार निशाने पर कौन होगा?
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर की ओर से घायल पुलिसकर्मी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। साथ ही उम्मीद है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के साथ-साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
