
रविंद्रनगर, कुशीनगर | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
जनपद कुशीनगर स्थित राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध जिला संयुक्त चिकित्सालय की स्वच्छता व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जहां अस्पतालों को संक्रमण-मुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज परिसर में इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन, नीडिल, सिरिंज और अन्य जैव-चिकित्सा अपशिष्ट (बायोमेडिकल वेस्ट) खुले में बिखरे मिलने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित आयुष विभाग के समीप बड़ी मात्रा में चिकित्सकीय कचरा खुले स्थान पर लावारिस हालत में पड़ा मिला। यह दृश्य न केवल स्वच्छता के सरकारी दावों की पोल खोलता है, बल्कि अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। खुले में पड़े इन संक्रमित अपशिष्टों से मरीजों, तीमारदारों, सफाईकर्मियों और आसपास आने-जाने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में उपयोग किए गए इंजेक्शन और नीडिल का सुरक्षित निस्तारण होना अनिवार्य है। यदि कोई बच्चा, राहगीर या कर्मचारी गलती से इनकी चपेट में आ जाए तो संक्रमण फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक ओर सरकार “स्वच्छ भारत मिशन” और स्वच्छ अस्पताल अभियान के तहत स्वास्थ्य संस्थानों में साफ-सफाई और बायोमेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर लगातार जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर मेडिकल कॉलेज परिसर में सामने आई यह तस्वीर व्यवस्था की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अस्पताल से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित संग्रहण और निस्तारण की जिम्मेदारी किसकी है? यदि जिम्मेदार एजेंसियां और अधिकारी समय रहते इस मामले का संज्ञान नहीं लेते, तो यह लापरवाही किसी बड़े संक्रमण का कारण बन सकती है।
विलेज फास्ट टाइम्स प्रशासन से मांग करता है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए तथा बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए, ताकि मरीजों और आमजन की सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता न हो।

