
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद में प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक बार फिर बड़ा फेरबदल किया गया है। उत्तर प्रदेश शासन के नियुक्ति अनुभाग-2 के निर्देशों के क्रम में जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने जनहित एवं प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उप जिलाधिकारियों (एसडीएम) के कार्यक्षेत्र में व्यापक बदलाव करते हुए नवीन तैनाती के आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को नए तैनाती स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार राजीव निगम को उप जिलाधिकारी पड़रौना, विवेक कुमार मिश्रा को कसया तथा कुणाल गौतम को तमकुहीराज का नया उप जिलाधिकारी बनाया गया है। वहीं अब तक तमकुहीराज की जिम्मेदारी संभाल रहीं आकांक्षा मिश्रा को स्थानांतरित कर कप्तानगंज भेजा गया है। इसके अलावा डॉ. संतराज, जो अब तक कसया में एसडीएम थे, उन्हें उप जिलाधिकारी (न्यायिक), पड़रौना के पद पर तैनात किया गया है।
प्रशासनिक हलकों में इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन आम जनता के बीच एक सवाल भी तेजी से चर्चा में है—क्या केवल अधिकारियों की कुर्सियां बदलने से व्यवस्था बदल जाएगी, या फिर जनता को राजस्व, कानून-व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण में वास्तविक राहत भी मिलेगी?
जनपद की विभिन्न तहसीलों में लंबे समय से लंबित राजस्व विवाद, पैमाइश, नामांतरण, अवैध कब्जे, जन शिकायतों के निस्तारण में देरी और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में लोगों की अपेक्षा है कि नए अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर गांव-गांव पहुंचेंगे और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेंगे।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने सभी नवतैनात अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी प्रशासन सुनिश्चित करें। विकास कार्यों की नियमित समीक्षा, कानून-व्यवस्था पर सतत निगरानी तथा जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
हालांकि प्रशासनिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि तबादले व्यवस्था का सामान्य हिस्सा हैं, लेकिन असली परीक्षा अब नए पदभार की नहीं, बल्कि नई कार्यशैली की होगी। जनता को आदेशों से अधिक परिणाम चाहिए। यदि पुराने ढर्रे पर ही काम चलता रहा, तो यह फेरबदल भी केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगा। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बदलाव वास्तव में जनहित में साबित होता है या केवल कुर्सियों का स्थान परिवर्तन बनकर रह जाता है।
