
योजना सुविधा की या दुर्घटना की तैयारी? ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर विशेष संवाददाता
पडरौना, कुशीनगर। केंद्र व प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल-जल योजना” जहां लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, वहीं नगर पालिका परिषद पडरौना के वार्ड संख्या-25 परशुराम नगर अंतर्गत ग्राम पलिया में यही योजना अब स्थानीय लोगों के लिए परेशानी और खतरे का कारण बनती नजर आ रही है। यहां पाइपलाइन बिछाने के नाम पर सड़क को जगह-जगह खोद तो दिया गया, लेकिन मरम्मत के नाम पर जिम्मेदार विभाग ने मानो आंखें मूंद ली हों।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कुछ समय पहले ही सड़क का निर्माण कराया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि अब आवागमन आसान होगा, लेकिन जलापूर्ति योजना की खुदाई ने नई सड़क को बदहाल बना दिया। पाइप डालने के बाद सड़क को जिस तरीके से छोड़ा गया, उसने ग्रामीणों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। जगह-जगह गड्ढे, धंसी हुई मिट्टी और ऊबड़-खाबड़ रास्ते अब हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों गायब दिखाई दे रही हैं। सड़क की हालत ऐसी हो गई है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो रहा है। बाइक सवार और राहगीर रोज जोखिम उठाकर गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब तक दो से अधिक लोग सड़क पर गिरकर चोटिल हो चुके हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय निवासी वीरेंद्र मिश्र, झब्बर मिश्र, कुंदन मिश्र, संजय मिश्र समेत अन्य लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? क्या योजनाओं का मतलब केवल खुदाई करना है? क्या जनता की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति की चिंता करना विभागीय जिम्मेदारी नहीं है?
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर सड़क की समुचित मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास योजनाएं जनता को राहत देने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन यदि उन्हीं योजनाओं के कारण लोग चोटिल होने लगें तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर लोग टूटी सड़क, धूल, गड्ढों और दुर्घटना के डर के बीच “विकास” का दर्द झेलते रहेंगे। फिलहाल ग्राम पलिया में लोगों के बीच एक ही चर्चा है—“नल-जल योजना आई जरूर, लेकिन साथ में सड़क की दुर्दशा और खतरे का सौगात भी दे गई।”
