
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
दुदही/विशुनपुरा, कुशीनगर। विशुनपुरा थाना क्षेत्र से युवती के कथित रूप से बहला-फुसलाकर ले जाए जाने के मामले में आठ दिन बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज न होने के आरोप ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि न्याय की उम्मीद में वे लगातार थाने के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इससे परिवार गहरे सदमे और भय के माहौल में जी रहा है।
परिजनों का आरोप है कि 10 जुलाई को एक युवक उनकी बेटी को अपने साथ ले गया। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना देते हुए कार्रवाई की मांग की, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है और उन्हें युवती की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका सता रही है।
पीड़िता की मां का आरोप है कि जब उन्होंने आरोपी पक्ष से बेटी के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया तो उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया, मारपीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उन पर विभिन्न प्रकार का दबाव बनाया जा रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस मामले को लेकर स्थानीय लोगों में भी चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि यदि शिकायत मिलने के बाद समय पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई होती तो पीड़ित परिवार को बार-बार थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी संवेदनशील शिकायतों में देरी क्यों हो रही है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
उधर, थाना प्रभारी का कहना है कि शिकायत प्राप्त हुई है तथा मामले की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। क्षेत्र के लोगों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है तो विधि के अनुसार तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि पीड़ित परिवार का कानून पर भरोसा कायम रह सके। न्याय में अनावश्यक विलंब न केवल सवाल खड़े करता है, बल्कि पीड़ितों की पीड़ा भी बढ़ाता है।
