
विलेज फास्ट टाइम्स, जनपद कुशीनगर से विशेष संवाददाता
पडरौना, कुशीनगर (18 जुलाई 2026)। तहसील पडरौना परिसर में आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस में शनिवार को प्रशासनिक और पुलिस महकमे के शीर्ष अधिकारी एक ही मंच पर नजर आए। जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने स्वयं फरियादियों की शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों में नहीं, बल्कि मौके पर जाकर निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए।
समाधान दिवस में बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने भूमि विवाद, राजस्व संबंधी मामलों, पुलिस कार्रवाई, अतिक्रमण, सरकारी योजनाओं तथा अन्य जनसमस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा। जिलाधिकारी ने राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित कर प्रत्येक शिकायत का मौके पर जाकर सत्यापन करने और शत-प्रतिशत निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने उपस्थित पुलिस अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि सम्पूर्ण समाधान दिवस में प्राप्त प्रत्येक प्रार्थना पत्र केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का दस्तावेज है। इसलिए शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण किया जाए। जिन मामलों का निस्तारण उच्च स्तर से होना आवश्यक है, उन्हें बिना अनावश्यक विलंब के विस्तृत रिपोर्ट के साथ संबंधित अधिकारी को भेजा जाए, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिल सके।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही, टालमटोल या कागजी खानापूर्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी स्तर पर शिकायतों के समाधान में उदासीनता सामने आती है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
हालांकि, वर्षों से आमजन के बीच यह धारणा भी बनी हुई है कि कई बार समाधान दिवस में शिकायतें तो दर्ज हो जाती हैं, लेकिन उनका वास्तविक निस्तारण धरातल पर दिखाई नहीं देता। यही कारण है कि हर बार जनता की सबसे बड़ी उम्मीद केवल सुनवाई नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण कार्रवाई होती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस बार दिए गए सख्त निर्देश कितनी तेजी और ईमानदारी से जमीन पर उतरते हैं।
जनता का कहना है कि यदि अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें और दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो, तो सम्पूर्ण समाधान दिवस की सार्थकता और अधिक बढ़ेगी। केवल रिपोर्ट तैयार कर फाइल बंद कर देना किसी भी पीड़ित की समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
प्रशासन की मंशा स्पष्ट दिखाई दी कि शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अब यह जिम्मेदारी अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की है कि वे इन निर्देशों को केवल आदेश न मानें, बल्कि जनता के विश्वास को कायम रखने का माध्यम बनाएं।
कुशीनगर की जनता की अपेक्षा भी यही है कि सम्पूर्ण समाधान दिवस केवल एक मासिक औपचारिक कार्यक्रम बनकर न रह जाए, बल्कि ऐसा प्रभावी मंच बने जहाँ हर फरियादी को समयबद्ध, निष्पक्ष और वास्तविक न्याय मिल सके। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन के सख्त निर्देश कितने प्रभावी साबित होते हैं और जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।
