
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता | 12 जून
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस पर गुरुवार को कुशीनगर जनपद में बाल श्रम के खिलाफ एक व्यापक और ऐतिहासिक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन, श्रम विभाग और विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास से न केवल लोगों को जागरूक किया गया बल्कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भी संदेश दिया गया।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कलेक्ट्रेट परिसर से विशाल जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। रैली में विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और छात्र-छात्राओं सहित 200 से अधिक लोगों ने भाग लिया। पूरे शहर में गूंज रहे नारों— “हर बच्चा स्कूल जाए”, “बाल श्रम अपराध है”, “बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण करें”—ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, मजदूरी के औजार नहीं। बाल श्रम समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है और इसके उन्मूलन के लिए प्रशासन पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने आमजन से भी इस अभियान में सहयोग करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. चन्द्र प्रकाश वर्मा तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारी अलंकृता उपाध्याय द्वारा हस्ताक्षर अभियान का शुभारम्भ किया गया। अधिकारियों और नागरिकों ने बाल श्रम मुक्त कुशीनगर बनाने का संकल्प लिया।
अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तब सामने आया जब श्रम विभाग की टीम ने रवीन्द्रनगर से कसया तक सघन निरीक्षण अभियान चलाया। विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच के दौरान 15 बाल एवं किशोर श्रमिकों को चिन्हित कर तत्काल अवमुक्त कराया गया। साथ ही बाल श्रम कराने वाले सेवायोजकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से बाल श्रम कराने वालों में हड़कंप मच गया।
दोपहर में पडरौना में व्यापार मंडल के पदाधिकारियों एवं व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित कर बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी दी गई। व्यापारियों ने भी बाल श्रम मुक्त कुशीनगर के निर्माण में सहयोग देने का भरोसा दिलाया।
बैठक में शिक्षाविद् डॉ. सी.वी. सिंह ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन मिलना उसका अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के अंत में प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि बाल श्रम के खिलाफ यह अभियान केवल एक दिवस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लगातार जारी रहेगा। जिला प्रशासन ने दोहराया कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और हर बच्चे को शिक्षा एवं सुरक्षित बचपन दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
