
विलेज फर्स्ट टाइम कुशीनगर से विशेष संवददाता
कुशीनगर जनपद के तमकुहीराज विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धुरियाकोट में पंचायत व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्राम प्रधान प्रीति चौरसिया ने पंचायत सचिव और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) पर गंभीर अनियमितताओं, मनमानी और विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इस घटनाक्रम ने
विकासखंड स्तर पर कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्राम प्रधान का आरोप है कि उन्होंने पंचायत सचिव और बीडीओ के कार्यों को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो निष्पक्ष जांच कराई गई और न ही किसी प्रकार की प्रभावी कार्रवाई हुई। उनका कहना है कि लगातार उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ग्राम पंचायत के विकास कार्य प्रभावित हुए, जिससे अंततः उन्हें पद छोड़ने जैसा कठोर निर्णय लेना पड़ा।
प्रधान ने उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम-1947 की धारा 14(1) के तहत अपना त्यागपत्र स्वीकार करते हुए तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब जनप्रतिनिधि की शिकायतों को ही गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तो गांव के विकास और जनता की अपेक्षाओं को कैसे पूरा किया जा सकेगा।
यह मामला केवल एक ग्राम प्रधान के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करता है। यदि निर्वाचित जनप्रतिनिधि खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, तो आम जनता की शिकायतों के निस्तारण की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाले अधिकारियों के सामने अब यह प्रकरण एक बड़ी परीक्षा बनकर खड़ा है।
फिलहाल जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपे गए इस्तीफे पर अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला भी शिकायतों की फाइलों में दबकर रह जाएगा। यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, और यदि इनमें सच्चाई है तो दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए आवश्यक होगी।
