
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
लखनऊ हादसे से भी नहीं चेता प्रशासन, हजारों छात्रों और पर्यटकों की जान भगवान भरोसे
कुशीनगर। राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग संस्थान में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और फायर सेफ्टी को लेकर तमाम दावे किए गए, लेकिन कुशीनगर में हालात आज भी जस के तस दिखाई दे रहे हैं। जिले के होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरियां सुरक्षा मानकों को धता बताते हुए धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
बुद्ध मंदिर मार्ग सहित जिले के प्रमुख कस्बों और नगर क्षेत्रों में दर्जनों होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थान और 24 घंटे संचालित होने वाली लाइब्रेरियां चल रही हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन सैकड़ों छात्र-छात्राएं, अभिभावक और पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजामों की स्थिति बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। अधिकांश प्रतिष्ठानों में फायर विभाग की अनिवार्य एनओसी तक नहीं है। जहां अग्निशमन यंत्र लगे भी हैं, वहां वे केवल दिखावे की वस्तु बनकर रह गए हैं।

‘टाइम बम’ बने कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरियां
जिले के कई कोचिंग सेंटर तंग गलियों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और बहुमंजिला इमारतों में संचालित हो रहे हैं। कई भवनों में आपातकालीन निकास, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और सुरक्षा संकेतक जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। यदि किसी कारणवश आग लग जाए या भगदड़ मच जाए तो दर्जनों जानें मिनटों में खतरे में पड़ सकती हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है।
कमाई लाखों की, सुरक्षा पर खर्च शून्य
सूत्रों की मानें तो कई संस्थान हर महीने लाखों रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा इंतजामों पर खर्च करने से बच रहे हैं। कहीं पुरानी और जर्जर वायरिंग है तो कहीं जनरेटर और एसी के बीच आग से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं। ऐसे में किसी भी समय छोटी चिंगारी बड़े अग्निकांड का रूप ले सकती है।
प्रशासन की खामोशी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि फायर विभाग, नगर निकाय और जिला प्रशासन आखिर जांच अभियान क्यों नहीं चला रहे? यदि फायर एनओसी और सुरक्षा मानक अनिवार्य हैं तो बिना इनके संस्थानों का संचालन किसकी शह पर हो रहा है? क्या नियम केवल कागजों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाए गए हैं?
पर्यटन नगरी की प्रतिष्ठा भी खतरे में
विश्व प्रसिद्ध बौद्ध पर्यटन स्थल कुशीनगर में हर वर्ष हजारों विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में किसी होटल या सार्वजनिक प्रतिष्ठान में बड़ा हादसा होने पर न केवल जनहानि होगी, बल्कि जिले और प्रदेश की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी गहरा नुकसान पहुंचेगा।
लखनऊ हादसे ने पूरे प्रदेश को चेतावनी दी है, लेकिन कुशीनगर में अभी भी हालात नहीं बदले हैं। अब समय आ गया है कि होटल, रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरियों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। वरना कहीं ऐसा न हो कि जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी त्रासदी के बाद केवल कार्रवाई का दिखावा करते नजर आएं और तब तक बहुत देर हो चुकी हो।
