
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और सरकारी निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुपालन में जारी आदेश के बाद जिले के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री के नियम पूरी तरह बदल गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब संस्थागत, औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ता सीधे खुदरा पेट्रोल पंपों से पेट्रोल अथवा डीजल नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता केवल अपने अधिकृत उपभोक्ता पंपों से ही पूरी करनी होगी।
जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब खुदरा बिक्री केंद्रों पर डीजल केवल वाहन के टैंक अथवा PESO से अनुमोदित कंटेनर में ही दिया जाएगा। साथ ही किसी भी ग्राहक या वाहन को एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही उपलब्ध कराया जाएगा। प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया है कि खरीदे गए डीजल की दोबारा बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इन प्रावधानों का उद्देश्य कालाबाजारी, अनधिकृत भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था में गड़बड़ी पर प्रभावी रोक लगाना है।
हालांकि प्रशासन ने किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए राहत भी दी है। खरीफ सीजन की तैयारियों और कृषि कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए किसानों को एक बार में अधिकतम 20 लीटर डीजल उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा रेलवे, सड़क, भवन निर्माण जैसे सरकारी विकास कार्यों तथा अस्पताल, मोबाइल टावर सहित अन्य अत्यावश्यक सेवाओं के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। संबंधित विभागों को जिला पूर्ति अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को मांग पत्र भेजना होगा, जिसकी स्वीकृति मिलने के बाद ही अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराया जाएगा।
जिलाधिकारी ने जिले के सभी पेट्रोल पंप संचालकों, तेल विपणन कंपनियों के स्थानीय अधिकारियों तथा जिला पूर्ति अधिकारी को आदेश का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी, अनधिकृत बिक्री या किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक एवं विधिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था फिलहाल 90 दिनों की प्रारंभिक अवधि तक प्रभावी रहेगी अथवा केंद्र अथवा राज्य सरकार द्वारा संशोधित या निरस्त किए जाने तक लागू रहेगी। जिलाधिकारी के इस फैसले को जिले में पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। किसानों को राहत और आवश्यक सेवाओं की निरंतरता बनाए रखते हुए सख्त निगरानी की यह नीति जिले में ईंधन वितरण व्यवस्था को नए स्वरूप में लागू
