

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
विशेष संवाददाता
दुदही/कुशीनगर। दुदही विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत बूढ़कोट (बहपुरवा) गांव में मंगलवार की शाम बिजली व्यवस्था से नाराज ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। वर्षों से जर्जर विद्युत तारों, बार-बार होने वाले फॉल्ट और लगातार बाधित बिजली आपूर्ति से परेशान ग्रामीणों ने विद्युत उपकेंद्र का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव से गुजर रही हाईटेंशन लाइन के तार पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। तेज हवा या हल्की बारिश होते ही तार टूटकर नीचे गिर जाते हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। कई बार फॉल्ट होने के कारण घंटों तक बिजली आपूर्ति ठप रहती है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों, दुकानदारों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि समस्या जस की तस बनी रहती है।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीण लक्ष्मण गुप्ता, मुकेश कुमार, बब्बन मौर्य, रमेश मटेशिया, दिलीप कुमार और रवि मटेशिया सहित अन्य लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों को लिखित और मौखिक शिकायत दी, लेकिन आज तक जर्जर तार नहीं बदले गए। ग्रामीणों ने मांग की कि पूरे क्षेत्र की विद्युत लाइन का सर्वे कर तत्काल पुराने तार बदले जाएं और फॉल्ट की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
मामले को लेकर दुदही विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता (जेई) सुरेश दुबे ने बताया कि कई लोग बिना विभागीय अनुमति के बिजली लाइन से अवैध कनेक्शन जोड़ लेते हैं, जिससे लाइन पर ओवरलोड बढ़ जाता है और बार-बार फॉल्ट की समस्या उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि फॉल्ट की सूचना मिलते ही विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करती है।
जेई ने यह भी जानकारी दी कि जर्जर तारों को बदलने के लिए संबंधित अधिकारियों को प्रस्ताव भेज दिया गया है। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि एक सप्ताह के भीतर तार बदलने का कार्य शुरू कराया जाएगा और बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि केवल अधिकृत बिजली कनेक्शन का ही उपयोग करें तथा विद्युत लाइन से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्धारित समय सीमा में समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे पुनः बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी बिजली विभाग की होगी।
