
खुदाई में निकला कथित मुगलकालीन खजाना, जिसने जितना समेटा उतना लेकर हुआ फरार; वायरल तस्वीरों से प्रशासन में हड़कंप
कुशीनगर। तरयासुजान क्षेत्र के ओझवलिया गांव में एक साधारण मिट्टी की खुदाई ने ऐसा रहस्य उगल दिया, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। सोमवार शाम जेसीबी मशीन का पंजा जैसे ही जमीन की गहराई तक पहुंचा, वैसे ही मिट्टी के भीतर दबे पुराने सिक्कों का कथित जखीरा बाहर आने लगा। देखते ही देखते खेत में मौजूद मजदूरों और ग्रामीणों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जिसने जितने सिक्कों पर हाथ साफ किया, वह उन्हें समेटकर चलता बना।
ग्रामीणों के अनुसार गांव निवासी राधेश्याम वर्मा के खेत में मिट्टी की खुदाई कराई जा रही थी। तभी जेसीबी के पंजे से कुछ धातु जैसी वस्तुएं निकलनी शुरू हुईं। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य समझा, लेकिन जब मिट्टी से बड़ी संख्या में पुराने सिक्के निकलने लगे तो वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं। कुछ ही मिनटों में यह खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मौके से 15 से 20 किलोग्राम तक पुराने सिक्के निकले हैं। हालांकि इस दावे की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन गांव में चल रही चर्चाओं ने इस मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सिक्के निकलते ही लोगों में उन्हें बटोरने की होड़ मच गई। कोई थैले में भरकर ले गया तो कोई जेबों में ठूंसकर घर पहुंच गया। हालात ऐसे रहे कि कथित खजाने का बड़ा हिस्सा प्रशासन की नजरों से पहले ही गायब हो गया।
मंगलवार सुबह जैसे ही सिक्कों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई। वायरल तस्वीरों में दिखाई दे रहे सिक्कों को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग उन्हें मुगलकालीन बता रहे हैं तो कुछ इसे किसी प्राचीन बस्ती या ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा मान रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी विशेषज्ञ संस्था या पुरातत्व विभाग ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है।
सूत्रों की मानें तो राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जानकारी जुटाने में लग गया है। चर्चा है कि यदि सिक्कों के ऐतिहासिक महत्व के संकेत मिलते हैं तो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम को भी जांच के लिए बुलाया जा सकता है। प्रशासन यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर जमीन के भीतर इतने बड़े पैमाने पर सिक्के पहुंचे कैसे और कब से दबे हुए थे।
गांव में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सिक्के अपने कब्जे में लेने वाले कुछ लोग अब कार्रवाई की आशंका से घरों से गायब बताए जा रहे हैं। पूरे दिन चौपालों, गलियों और बाजारों में सिर्फ इसी रहस्यमयी खजाने की चर्चा सुनाई देती रही। कोई इसे इतिहास का दबा हुआ अध्याय बता रहा है तो कोई इसे सदियों पुराने राज का संकेत मान रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ओझवलिया की मिट्टी से निकले ये सिक्के वास्तव में इतिहास की कोई अनमोल धरोहर हैं या फिर वायरल दावों की चमक में छिपा कोई और सच? फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन इस कथित खजाने ने पूरे इलाके की उत्सुकता को चरम पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में जांच की रिपोर्ट यह तय करेगी कि यह खोज इतिहास के पन्नों में दर्ज होगी या फिर सिर्फ एक वायरल सनसनी बनकर रह जाएगी।
