
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद के पडरौना कोतवाली क्षेत्र के खिरकिया में “इलाज” की आड़ में चल रहे एक कथित अस्पताल का भयावह सच सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। “मुन्ना पाली क्लिनिक” नाम से संचालित इस अस्पताल पर आरोप है कि यहां कथित झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा किए गए गलत इलाज ने एक महिला की जिंदगी को मौत के मुहाने पर पहुंचा दिया। मामला प्रशासन तक पहुंचा तो तहसील प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची, जहां जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद क्लिनिक को सील कर दिया गया।

सूत्रों के मुताबिक बिहार के पश्चिमी चंपारण जनपद अंतर्गत धनहा थाना क्षेत्र के खोतहवा गांव निवासी अर्जुन शाह अपनी पत्नी सीमा देवी का प्रसव लगभग पखवाड़े पहले बिहार में कराए थे। प्रसव के बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। आरोप है कि इसी बीच बिहार की आशा कार्यकर्ता किरन देवी ने बेहतर इलाज का भरोसा देकर परिजनों को खिरकिया स्थित मुन्ना पाली क्लिनिक पहुंचाया। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद कथित डॉक्टर ने इलाज के नाम पर महिला के गर्भाशय के साथ गंभीर छेड़छाड़ की, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
पीड़ित परिवार का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने न तो बीमारी की गंभीरता बताई और न ही समय रहते किसी सक्षम अस्पताल में रेफर किया। गलत इलाज, लापरवाही और कथित गैर-प्रशिक्षित हाथों के प्रयोग ने महिला को जिंदगी और मौत के बीच झूलने पर मजबूर कर दिया। मामला जब प्रशासन तक पहुंचा तो तहसीलदार अभिषेक मिश्रा और एमवाईसी डॉ. धीरज सिंह स्वास्थ्य टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जांच के दौरान क्लिनिक में न तो निर्धारित मानक मिले, न विशेषज्ञ चिकित्सक और न ही वैध चिकित्सा व्यवस्था। बताया जा रहा है कि क्लिनिक का पंजीकरण आयुर्वेद पद्धति के नाम पर था, जबकि अंदर गंभीर मरीजों का एलोपैथिक इलाज किए जाने के आरोप मिले। सूत्रों का दावा है कि अस्पताल संचालन से जुड़े कई जरूरी दस्तावेज भी संतोषजनक नहीं पाए गए। जांच के दौरान अस्पताल संचालक तबरेज आलम द्वारा कार्रवाई प्रभावित करने और टीम को उलझाने की कोशिशें भी चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आगे उसकी एक न चली और क्लिनिक को सील कर दिया गया।

घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि ग्रामीण और गरीब परिवार सस्ते इलाज के नाम पर ऐसे कथित अस्पतालों के जाल में फंस रहे हैं, जहां इलाज नहीं बल्कि जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना मानक, बिना विशेषज्ञ डॉक्टर और संदिग्ध व्यवस्थाओं वाले ऐसे अस्पताल किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं? फिलहाल प्रशासन आगे की कार्रवाई में जुटा है, जबकि पीड़ित परिवार दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
