
12 चक्का ट्रक पर 25 घनमीटर का आईएसटीपी! वाहन बदला या कागजों में बदली गई हकीकत?
चार घनमीटर के आईएसटीपी पर बड़े वाहनों के संचालन के आरोपों ने बढ़ाई चिंता, दो माह के रिकॉर्ड के क्रॉस-वेरिफिकेशन की मांग
तमकुहीराज/कुशीनगर। (विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता)।
कुशीनगर में बालू परिवहन को लेकर सवाल अब सिर्फ ओवरलोडिंग और सड़क पर दौड़ते ट्रकों तक सीमित नहीं रह गए हैं। तमकुहीराज क्षेत्र से सामने आए एक कथित आईएसटीपी ने परिवहन व्यवस्था की निगरानी, दस्तावेजों की विश्वसनीयता और बालू कारोबार की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला 12 चक्का ट्रक यूपी53 ईटी/1621 से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके नाम पर कथित तौर पर 25 घनमीटर बालू का आईएसटीपी सामने आया है।मामले में सबसे चौंकाने वाला सवाल यह है कि आखिर 12 चक्का वाहन के नाम पर इतनी मात्रा कैसे दर्ज हुई? आरोप यह भी है कि उक्त आईएसटीपी मूल रूप से किसी बड़े ट्रेलर के लिए तैयार किया गया था और बाद में ट्रेलर का नंबर हटाकर 12 चक्का ट्रक का नंबर दर्ज कर दिया गया, लेकिन दस्तावेज में दर्ज 25 घनमीटर की मात्रा कथित रूप से नहीं बदली गई।
यानी सवाल बेहद सीधा है—अगर वाहन बदला गया तो मात्रा क्यों नहीं बदली गई? और अगर वाहन वही था तो उसकी क्षमता के अनुरूप 25 घनमीटर की प्रविष्टि का तकनीकी आधार क्या है?कागज पर ‘बड़ा खेल’ या महज तकनीकी गलती?यह मामला केवल एक आईएसटीपी तक सीमित मानकर छोड़ देना शायद पर्याप्त नहीं होगा। यदि दस्तावेज में वाहन संख्या, वाहन का प्रकार और दर्ज बालू की मात्रा में वास्तविक विसंगति है, तो इसकी तह तक पहुंचने के लिए मूल रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।कथित तौर पर क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि बड़े वाहनों को छोटे वाहनों की श्रेणी में दिखाकर कम मात्रा का आईएसटीपी जारी कराया जाता है। आरोप है कि 14, 16, 18 और 22 चक्का वाहनों के संबंध में भी चार घनमीटर जैसे छोटे आईएसटीपी के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं।
यदि यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे सरकारी राजस्व, खनन व्यवस्था और परिवहन निगरानी—तीनों पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।टड़वा से बनकटा तक निगरानी व्यवस्था पर सवाल तमकुही थाना क्षेत्र के टड़वा चौराहा, सरेया खुर्द पुल, समउर, रकबा और बनकटा सहित कई इलाकों में बालू लदे वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि संदिग्ध दस्तावेज वाले अथवा बिना आईएसटीपी के वाहनों को स्थानीय स्तर पर कथित ‘मैनेजमेंट’ के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है।हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि जांच एजेंसियां वास्तव में स्थिति स्पष्ट करना चाहती हैं तो पिकेटवार रिकॉर्ड, वाहन जांच की रिपोर्ट, पकड़े गए वाहनों का विवरण और संबंधित आईएसटीपी का मिलान महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।सवाल यह भी है कि यदि सड़क पर वाहन की जांच होती है तो उसके दस्तावेज की वास्तविकता का मिलान खदान के मूल रिकॉर्ड से कितनी बार किया जाता है?
तरयासुजान की घटना से बढ़ी चिंता

इसी बीच तरयासुजान थाना क्षेत्र में आईएसटीपी से बचने के लिए कथित तौर पर दूसरे वाहन का नंबर इस्तेमाल किए जाने के आरोप में बीआर28 जीए/9448 वाहन पकड़े जाने और जालसाजी से संबंधित मुकदमा दर्ज होने की घटना भी सामने आ चुकी है।ऐसे में तमकुहीराज में कथित आईएसटीपी विसंगति का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा केवल एक वाहन तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं अलग-अलग घटनाओं में दस्तावेज, वाहन संख्या और लोडिंग विवरण से संबंधित कोई समान पैटर्न तो नहीं है।दो महीने का रिकॉर्ड खोलेगा ‘कागजी खेल’ का राज?इस पूरे मामले की असली तस्वीर किसी एक ट्रक को रोककर नहीं, बल्कि डेटा के क्रॉस-वेरिफिकेशन से सामने आ सकती है।पिछले दो महीनों में जारी आईएसटीपी का वाहनवार ऑडिट कराया जाए। प्रत्येक वाहन का पंजीयन नंबर, चक्का संख्या, अनुमन्य क्षमता, आईएसटीपी में दर्ज मात्रा, खदान से निकलने का समय और गंतव्य आपस में मिलाया जाए।
इसके साथ संबंधित खदान के डिस्पैच रजिस्टर, इलेक्ट्रॉनिक लॉग, लोडिंग रिकॉर्ड और आईएसटीपी के मूल विवरण की जांच की जाए। यदि रिकॉर्ड में वाहन बदलने के बाद मात्रा नहीं बदली गई है, या बड़े वाहन को छोटे वाहन के रूप में दर्ज किया गया है, तो यह महज लिपिकीय त्रुटि है या जानबूझकर किया गया कृत्य—यह जांच से स्पष्ट हो सकता है।
डीएम-एसपी स्तर से हो सख्त क्रॉस-वेरिफिकेशन
बालू परिवहन पर पुलिस अधीक्षक केशव कुमार की सख्ती और अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देशों के बीच यदि संदिग्ध दस्तावेज वाले वाहन लगातार सीमा क्षेत्र में आवाजाही कर रहे हैं, तो स्थानीय निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत किसी एक वाहन को पकड़कर कार्रवाई करने से आगे बढ़ने की है। आईएसटीपी जारी करने से लेकर खदान में लोडिंग, वाहन के रवाना होने, रास्ते की निगरानी और अंतिम गंतव्य तक पहुंचने की पूरी श्रृंखला का ऑडिट होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—कितने आईएसटीपी जारी हुए? कितनों में वाहन की क्षमता और दर्ज मात्रा में अंतर है? कितने वाहनों के नंबर और दस्तावेज में विसंगति मिली? और कितने वाहनों की वास्तविक आवाजाही रिकॉर्ड में दर्ज विवरण से मेल खाती है?

फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन 12 चक्का ट्रक पर कथित 25 घनमीटर का आईएसटीपी और वाहन संख्या में बदलाव की आशंका ने इतने गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं कि अब जवाब केवल सड़क पर खड़े ट्रक से नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की गहन जांच से तलाशना होगा।
अगर रिकॉर्ड साफ है तो जांच आरोपों की हवा निकाल देगी। लेकिन यदि दस्तावेजों में सचमुच कोई खेल सामने आता है, तो यही जांच उस पूरी श्रृंखला तक पहुंचने की कड़ी बन सकती है, जहां कथित तौर पर बालू, आईएसटीपी और ‘मैनेजमेंट’ का खेल संचालित होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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