
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद में सार्वजनिक भूमि, ग्राम समाज की जमीन और चकमार्गों पर वर्षों से जमे अवैध कब्जों के खिलाफ प्रशासन ने अब निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है। उपजिलाधिकारी पडरौना आशुतोष के नेतृत्व में चल रहे विशेष राजस्व अभियान ने उन लोगों की नींद उड़ा दी है जिन्होंने सरकारी भूमि को अपनी निजी संपत्ति समझ रखा था। राजस्व विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर अभिलेखों के आधार पर पैमाइश, सीमांकन और चिन्हांकन का कार्य तेजी से कर रही हैं, जिससे अवैध कब्जेदारों में खलबली मची हुई है।
प्रशासन की इस व्यापक कार्रवाई के तहत विभिन्न राजस्व निरीक्षक क्षेत्रों में अब तक 35 से अधिक गाटा संख्याओं एवं चकमार्गों की पैमाइश और सीमांकन का कार्य पूरा कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल शुरुआत है, आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र में अभियान को और अधिक प्रभावी ढंग से चलाया जाएगा। सरकारी भूमि पर कब्जा जमाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
राजस्व विभाग की टीमें अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कर रही हैं। पैमाइश पूरी होने के बाद भूमि और चकमार्गों का स्पष्ट चिन्हांकन कर उन्हें संबंधित ग्राम प्रधानों को सुपुर्द किया जा रहा है, ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके। प्रशासन की इस सख्ती से ग्रामीण क्षेत्रों में यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंच रहा है कि सरकारी जमीन अब किसी की निजी जागीर नहीं रहने वाली।

पकड़ियार क्षेत्र में चला सीमांकन अभियान
राजस्व निरीक्षक क्षेत्र पकड़ियार के अंतर्गत मन्डार बिंदवलिया, खानू छपरा, चखनी पूरनछपरा, पकड़ियार तथा कुर्मीपट्टी गांवों में कुल छह गाटा संख्याओं की पैमाइश कर सीमांकन कराया गया। वहीं नौरंगिया क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव स्थित गाटा संख्या 193 की भी पैमाइश कर उसकी वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया गया। अधिकारियों ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों को भूमि अभिलेखों की जानकारी देते हुए सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक किया।
विशुनपुरा क्षेत्र में सबसे बड़ी कार्रवाई
विशुनपुरा राजस्व क्षेत्र में अभियान सबसे अधिक सक्रिय दिखाई दिया। यहां सात गाटा संख्याओं की पैमाइश और सीमांकन का कार्य संपन्न कराया गया। जंगल जगदीशपुर, मिश्रौली, सरपतही बुजुर्ग, माधवपुर गौसही, पटैरा खुर्द और दान्दोपुर गांवों में राजस्व टीम ने मौके पर पहुंचकर सीमाएं निर्धारित कीं। ग्रामीणों की मौजूदगी में किए गए इस कार्य ने भूमि विवादों के समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
इसी प्रकार कुबेरस्थान क्षेत्र के पड़री, भागड़ा, पिपरा जटामपुर और घोरघटिया गांवों में पांच गाटा संख्याओं की पैमाइश की गई। सिंगहा क्षेत्र के पिपरा खुर्द, हरपुर माफी, सिंगहा, विजयी छपरा और मोतीपुर गांवों में भी पांच गाटा संख्याओं का सीमांकन कर राजस्व अभिलेखों को जमीनी हकीकत से जोड़ा गया।
चकमार्गों को मिला नया जीवन
ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की रीढ़ माने जाने वाले चकमार्गों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए भी प्रशासन पूरी गंभीरता से जुटा हुआ है। रवींद्रनगर क्षेत्र के नादह, चौपरिया, हरैया खुर्द और धरमपुर बुजुर्ग गांवों में चार चकमार्गों का चिन्हांकन कर उन्हें ग्राम प्रधानों को सौंप दिया गया। वहीं पडरौना क्षेत्र के सुरुकपुरा, केवलछपरा, लमुहा और कठकुइयां गांवों में पांच चकमार्गों की पैमाइश और सीमांकन सुनिश्चित किया गया।
जंगल खिड़किया क्षेत्र के पटेरिया आबादकारी गांव में स्थित चकमार्ग संख्या 232 की भी पैमाइश कर उसका सीमांकन पूरा किया गया और संबंधित ग्राम प्रधान को सुपुर्द कर दिया गया। इससे ग्रामीणों को आवागमन में आने वाली बाधाओं से राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
कब्जेदारों पर प्रशासन की कड़ी नजर
राजस्व अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक भूमि और चकमार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखना, ग्रामीणों को सुगम आवागमन उपलब्ध कराना तथा राजस्व अभिलेखों के अनुरूप भूमि की वास्तविक स्थिति सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
जनपद में चल रही इस मुहिम को ग्रामीण विकास, सुशासन और भूमि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गांव-गांव खिंच रही सीमारेखा अब यह संकेत दे रही है कि सरकारी जमीन पर टेढ़ी नजर रखने वालों के दिन पूरे होने वाले हैं। राजस्व विभाग की सख्ती ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कानून की लकीर के बाहर कोई नहीं रहेगा और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जाएगी।
