
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता अमित कुमार कुशवाहा
कुशीनगर। जिले के खड्डा थाना क्षेत्र में एक वायरल ऑडियो ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस कथित ऑडियो में शालिकपुर चौकी से जुड़े एक पुलिस अधिकारी और शराब कारोबार से जुड़े बताए जा रहे व्यक्ति के बीच बातचीत होने का दावा किया जा रहा है। ऑडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर सच्चाई क्या है।
बताया जा रहा है कि 31 मई की सुबह पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी जांच की थी। चर्चा है कि वाहन से बड़ी मात्रा में अवैध शराब बरामद हुई थी। इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो में कथित तौर पर रुपये के लेन-देन, रकम बढ़ाने-घटाने और कार्रवाई के स्वरूप को लेकर बातचीत होने की बात कही जा रही है।
हालांकि इस ऑडियो की सत्यता की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस प्रकार की बातें वायरल रिकॉर्डिंग में सुनाई देने का दावा किया जा रहा है, उसने पुलिस विभाग को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। यदि जांच में यह ऑडियो सही पाया जाता है तो मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब का कारोबार कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर पुलिस द्वारा शराब बरामदगी, तस्करों की गिरफ्तारी और बड़ी कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं। प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती हैं, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाता। ऐसे में वायरल ऑडियो ने लोगों के मन में कई नए सवाल पैदा कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कानून का पालन कराने वाले ही संदेह के घेरे में आ जाएं तो अपराधियों का मनोबल बढ़ना स्वाभाविक है। यही वजह है कि सोशल मीडिया से लेकर चौराहों और गांवों तक इस मामले की चर्चा हो रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या अवैध कारोबार के पीछे कोई मजबूत संरक्षण तंत्र काम कर रहा है या फिर यह पूरा मामला किसी साजिश का हिस्सा है? इन सवालों का जवाब अब जांच रिपोर्ट ही दे सकेगी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी खड्डा ने जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि वायरल ऑडियो की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच कराई जा रही है। यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। वहीं यदि ऑडियो भ्रामक या छेड़छाड़ कर तैयार किया गया पाया गया तो उसके पीछे के लोगों पर भी कार्रवाई संभव है।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है, लेकिन इतना तय है कि इस वायरल ऑडियो ने खड्डा पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब जनता की नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होती है या फिर यह मामला भी फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगा।
सवाल सिर्फ एक वायरल ऑडियो का नहीं है, बल्कि उस भरोसे का है जो आम जनता कानून और व्यवस्था की रक्षा करने वाली संस्था पर करती है। अब देखना यह होगा कि जांच सच्चाई को सामने लाती है या फिर सवालों का यह धुआं यूं ही हवा में तैरता रहता है।
