
विश्व पर्यावरण दिवस पर जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने किया पौधरोपण, संरक्षण के संकल्प पर टिकी निगाहें
05 जून | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जनपद कुशीनगर के कसया विकास खंड अंतर्गत कुलकुला माता मंदिर परिसर स्थित वन विभाग की भूमि पर गुरुवार को बृहद वृक्षारोपण अभियान का शुभारम्भ किया गया। वन विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। हालांकि हर वर्ष लगाए जाने वाले लाखों पौधों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना रहता है कि आखिर इनमें से कितने पौधे आने वाले वर्षों तक जीवित रह पाते हैं।
कार्यक्रम में कुशीनगर सांसद विजय कुमार दुबे, फाजिलनगर विधायक, जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव तथा प्रभागीय वनाधिकारी वरुण सिंह सहित अनेक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने पौधरोपण कर अभियान की औपचारिक शुरुआत की। वन विभाग द्वारा फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण किया गया, जिससे क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने के साथ पर्यावरण संतुलन को मजबूत किया जा सके।
प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुसार जनपद को इस वर्ष भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का दायित्व मिला है। विभिन्न विभागों के माध्यम से अभियान संचालित किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन का दावा है कि हरियाली बढ़ाने की दिशा में यह प्रयास मील का पत्थर साबित होगा। हालांकि आमजन के बीच यह चर्चा भी कम नहीं है कि पौधरोपण की तस्वीरें तो हर साल सुर्खियां बनती हैं, लेकिन कई स्थानों पर पौधों की देखभाल और संरक्षण अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाता।
सांसद विजय कुमार दुबे ने कहा कि पर्यावरण मानव जीवन का आधार है और वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनकी देखभाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। यदि प्रत्येक नागरिक इस जिम्मेदारी को निभाए तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा।
प्रभागीय वनाधिकारी वरुण सिंह ने बताया कि जनपद में वृक्षारोपण अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है तथा जनसहभागिता के माध्यम से हरित क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय लोगों ने पौधों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आज लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में घने वृक्ष बनकर पर्यावरण की रक्षा करेंगे या फिर केवल सरकारी आंकड़ों और फोटोग्राफ्स तक ही सीमित रह जाएंगे।
