
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर। से विषेश संवाददाता
कुशीनगर। जनपद में स्वच्छता, आवास और ग्रामीण विकास योजनाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह गंभीर नजर आ रहा है। विकास भवन सभागार में आयोजित जिला स्वच्छता समिति, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना तथा अन्नपूर्णा भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव ने साफ संकेत दे दिया कि अब केवल फाइलों में प्रगति दिखाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि योजनाओं का असर गांवों की धरती पर दिखाई देना चाहिए।
बैठक के दौरान स्वच्छता अभियान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त अभियान, शौचालय निर्माण और ग्राम पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान कई योजनाओं की धीमी प्रगति और विवादित भूमि के कारण अटके कार्यों पर मुख्य विकास अधिकारी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी योजनाओं को भूमि विवाद, लापरवाही या फाइलों की धूल का शिकार नहीं बनने दिया जाएगा।
सीडीओ ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में स्वच्छता मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए। गांवों में कूड़ा प्रबंधन, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण और उनका रखरखाव केवल रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि जनता को उसका प्रत्यक्ष लाभ मिले। उन्होंने यह भी कहा कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गांवों में गंदगी और अव्यवस्था दिखाई देती है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
बैठक में अन्नपूर्णा भवन निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 66 भवन पूर्ण हो चुके हैं। हालांकि प्रशासन का मानना है कि लक्ष्य के अनुरूप गति अभी और तेज किए जाने की आवश्यकता है। इसी क्रम में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापना, जन योजना अभियान, तालाबों की सफाई और रेट्रोफिटिंग जैसे कार्यों की भी समीक्षा हुई।
सबसे तीखी प्रतिक्रिया विवादित भूमि के मामलों को लेकर देखने को मिली। मुख्य विकास अधिकारी ने उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देश दिया कि लंबित पत्रावलियों को तत्काल प्रस्तुत कर भूमि आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। उनका स्पष्ट संदेश था कि योजनाएं कागजों पर नहीं, जमीन पर उतरनी चाहिए।
बैठक ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा कर दिया कि आखिर वर्षों से चल रही योजनाओं के बावजूद कई ग्राम पंचायतों में स्वच्छता और विकास की तस्वीर अपेक्षित स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पाई? प्रशासन की सख्ती के बाद अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अधिकारी और जिम्मेदार विभाग धरातल पर कितना बदलाव ला पाते हैं, या फिर समीक्षा बैठकों की गूंज फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।
