
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
विशेष संवाददाता
जनपद कुशीनगर में पत्राचार शिक्षा के नाम पर चल रहे खेल का आखिरकार बड़ा पर्दाफाश हो गया है। गंभीर अनियमितताओं और नियमों की खुलेआम अनदेखी के आरोप में पडरौना नगर स्थित गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज का पत्राचार पंजीकरण केंद्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। सत्र 2025–26 में करीब 700 छात्रों के आवेदन पत्रों में भारी गड़बड़ी मिलने के बाद अपर शिक्षा निदेशक पत्राचार शिक्षा संस्थान, प्रयागराज द्वारा यह सख्त कार्रवाई की गई है।
यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं होती रहीं और जिम्मेदार अधिकारी कब तक आंखें मूंदे बैठे रहे?
जानकारी के अनुसार, मामले की जांच के बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के निर्देश पर विद्यालय के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सैकड़ों छात्रों के आवेदन पत्रों में जरूरी अभिलेख गायब थे, कई दस्तावेजों में अंतर पाया गया और नियमानुसार सत्यापन भी नहीं किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कई छात्रों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर शुल्क भी जमा नहीं किया था, इसके बावजूद उनके आवेदन पत्र आगे भेज दिए गए। नियमों के अनुसार यह पूरी तरह अवैध प्रक्रिया है। इसके बावजूद आवेदन पत्र भेजे जाने से साफ जाहिर होता है कि पूरे मामले में नियमों को ताक पर रखकर काम किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि नियमानुसार हर छात्र का चालान अलग-अलग जमा होना चाहिए था, लेकिन यहां सभी छात्रों का चालान एक साथ जमा कर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
इतना ही नहीं, वर्ष 2024 के पंजीकरण आवेदन भी समय से विभाग को नहीं भेजे गए। विभाग ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए कड़ी टिप्पणी की है।

प्रधानाचार्य की जगह क्लर्क के हस्ताक्षर
मामले में सबसे हैरान करने वाला खुलासा तब हुआ जब कई आवेदन पत्रों पर प्रधानाचार्य के बजाय प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक के हस्ताक्षर पाए गए। यह न केवल प्रशासनिक नियमों का खुला उल्लंघन है बल्कि पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
जांच रिपोर्ट में इसे गंभीर अनियमितता माना गया और तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए संबंधित लिपिक को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
आखिर कैसे फंसा 700 छात्रों का भविष्य
पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा नुकसान उन करीब 700 छात्रों का हुआ है, जिन्होंने पत्राचार के माध्यम से अपनी पढ़ाई और परीक्षा के लिए आवेदन किया था। आरोप है कि पंजीकरण और परीक्षा से जुड़ी कई आवश्यक औपचारिकताओं को समय पर पूरा नहीं किया गया।
ऑनलाइन प्रविष्टियां समय से नहीं की गईं, दस्तावेजों का सत्यापन नहीं हुआ और कई जरूरी अभिलेख भी अपलोड नहीं किए गए। बताया जा रहा है कि नोडल अधिकारी की निगरानी में भी भारी लापरवाही बरती गई। वहीं विद्यालय स्तर पर कागजी प्रक्रिया में गंभीर चूक सामने आई।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, जो अंतिम सत्यापन की जिम्मेदारी निभाता है, वह भी समय रहते खामियों को पकड़ने और सुधारने में असफल रहा। परिणाम यह हुआ कि बोर्ड स्तर पर छात्रों के प्रवेश पत्र ही जारी नहीं हो सके, जिससे सैकड़ों छात्रों का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया।
अपर शिक्षा निदेशक ने जारी किया कड़ा आदेश
अपर शिक्षा निदेशक पत्राचार शिक्षा संस्थान प्रयागराज सी.एल. चौरसिया द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज पडरौना को पत्राचार पंजीकरण केंद्र संख्या-901 के रूप में मान्यता प्राप्त थी।
जिला विद्यालय निरीक्षक कुशीनगर की जांच आख्या दिनांक 13 जनवरी 2026 तथा माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के पत्र दिनांक 12 फरवरी 2026 में दर्ज तथ्यों के आधार पर यह पाया गया कि सत्र 2025-26 में पंजीकृत लगभग 700 छात्रों के आवेदन पत्रों में गंभीर अनियमितताएं की गई हैं।
इन अनियमितताओं में समय पर शुल्क जमा न होना, आवश्यक अभिलेखों का अभाव, सत्यापन प्रक्रिया में लापरवाही, आवेदन पत्र समय पर विभाग को न भेजना, प्रधानाचार्य के स्थान पर लिपिक द्वारा हस्ताक्षर करना और चालान प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन शामिल है।
इन सभी तथ्यों को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा पत्राचार पंजीकरण केंद्र संख्या-901 को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया गया। साथ ही विद्यालय को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि भविष्य में पत्राचार पंजीकरण या परीक्षा आवेदन से संबंधित कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह भी है कि जब अनियमितताएं इतनी व्यापक थीं तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर पहले क्यों नहीं पड़ी।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन केवल केंद्र निरस्त कर कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर उन सभी जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होती है, जिनकी लापरवाही ने 700 छात्रों के सपनों को अधर में लटका दिया।
फिलहाल यह मामला जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है और छात्र-अभिभावक न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
