
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर
अमित कुमार कुशवाहा, विशेष संवाददाता की खास रिपोर्ट
कुशीनगर में पुलिस महकमे के भीतर पनप रही रिश्वतखोरी की प्रवृत्ति पर अब सख्त शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिले के पुलिस अधीक्षक केशव कुमार चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए अब विभाग में कोई जगह नहीं बची है। इसी क्रम में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए विवेचना के नाम पर नगदी मांगने के आरोप में उपनिरीक्षक आलोक सिंह के खिलाफ कठोर कदम उठाया गया है।
मामला सामने आते ही पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से उपनिरीक्षक को निलंबित कर दिया। लेकिन कार्रवाई यहीं तक सीमित नहीं रही। पीड़ित की तहरीर के आधार पर उसी थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा भी दर्ज करा दिया गया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में केवल विभागीय जांच और निलंबन तक ही कार्रवाई सिमट जाती है, लेकिन इस बार सीधे मुकदमा दर्ज होने से पुलिस महकमे में साफ संदेश चला गया है कि अब रिश्वतखोरी करने वालों को सिर्फ लाइनहाजिर या निलंबन से नहीं, बल्कि कानून के कठघरे से भी गुजरना पड़ेगा।
बताया जा रहा है कि उपनिरीक्षक पर विवेचना के नाम पर पीड़ित से नगदी की मांग करने का आरोप था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कप्तान ने मामले की जांच कराई और प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर बिना देर किए कार्रवाई कर दी। इस कदम ने यह भी साबित कर दिया कि अगर शिकायत तथ्यात्मक हो तो कार्रवाई में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
पुलिस अधीक्षक की इस सख्ती से पूरे विभाग में हलचल मच गई है। पुलिस महकमे के अंदर यह चर्चा तेज है कि अब किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जाएगा। वहीं आम जनता के बीच भी इस कार्रवाई की व्यापक सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होती रही तो पुलिस व्यवस्था के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा।
दरअसल, यह कार्रवाई केवल एक अधिकारी पर की गई कार्यवाही भर नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र को दिया गया एक कड़ा संदेश भी है—
अब अगर किसी ने विवेचना या किसी भी काम के नाम पर जनता से रिश्वत मांगने की कोशिश की, तो उसके लिए सिर्फ निलंबन नहीं बल्कि सीधे जेल का रास्ता भी तैयार मिलेगा।
कुशीनगर पुलिस की इस पहल ने यह साफ कर दिया है कि अब विभाग में मनमानी, अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं बची है।
