


कुशीनगर। जनपद में कार्यरत मनरेगा कर्मचारियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। लंबे समय से मानदेय और ईपीएफ अंशदान का भुगतान न होने से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि वे लगातार सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को सफल बनाने में पूरी निष्ठा से योगदान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद विभागीय लापरवाही के कारण उनका मानदेय महीनों से लंबित पड़ा है।
कर्मचारियों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और उपयुक्त श्रम व रोजगार को संबोधित ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि जुलाई 2025 से अब तक उन्हें नियमित मानदेय नहीं मिला है। इसके कारण उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। हालात ऐसे हैं कि दीपावली और अब होली जैसे बड़े त्योहार भी बिना वेतन के गुजर गए, जिससे कर्मचारियों के परिवारों पर गंभीर असर पड़ा है।
मनरेगा कर्मियों का कहना है कि वे ग्राम रोजगार सेवक, कंप्यूटर ऑपरेटर, तकनीकी सहायक और अन्य पदों पर रहते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके साथ उपेक्षा का व्यवहार किया जा रहा है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 में वर्णित “जीवन के अधिकार” की भावना के भी विपरीत है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही लंबित भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
कर्मचारियों द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 3 मार्च 2026 से सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। इसके बाद 6 मार्च को विकास खंड स्तर पर कार्यक्रम अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 9 मार्च को उपमुख्यमंत्री को जनता दर्शन के माध्यम से स्थिति से अवगत कराया जाएगा, जबकि 10 से 15 मार्च तक जनप्रतिनिधियों—विधायक, सांसद और मंत्रियों—को भी इस मुद्दे से अवगत कराने का निर्णय लिया गया है।
कर्मचारियों ने साफ कहा है कि यदि 16 मार्च तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। कर्मचारियों की इस चेतावनी से प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है और अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
