
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर | विशेष संवाददाता | 11 मार्च
जनपद कुशीनगर में कानून व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन ने एक बार फिर सख्त तेवर दिखाए हैं। शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न थाना क्षेत्रों के 17 व्यक्तियों को छह माह के लिए जनपद की सीमा से निष्कासित (जिला बदर) कर दिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से अपराध जगत में खलबली मच गई है, जबकि आम जनता ने राहत की सांस ली है।
जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पुलिस की रिपोर्ट, उपलब्ध अभिलेखों तथा संबंधित मामलों की विस्तृत समीक्षा और सुनवाई के बाद यह कड़ा फैसला सुनाया। प्रशासन का साफ संदेश है कि जनपद में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के लिए अब कोई जगह नहीं बची है। जो लोग अब तक गुंडागर्दी और दबंगई के दम पर माहौल खराब करने का प्रयास करते थे, उन्हें अब जिले की सीमा से बाहर रहकर ही अपनी “दादागिरी” याद करनी होगी।
जिन लोगों को जिला बदर किया गया है उनमें साकीर अली निवासी नवापार, सत्येन्द्र निवासी जमुआन, भुआल निवासी मुण्डेरा, गुलाब जायसवाल निवासी डुम्मरभार, सूरज चौधरी निवासी पिपरही, कल्याण सिंह उर्फ डॉक्टर निवासी लोहझार, विपिन तिवारी निवासी छपिया, रामकृपाल यादव उर्फ धमारी निवासी रानीपार हरैया, निलेश चौबे निवासी फरदहां, हिदायतुल्लाह अंसारी, खुर्शीद उर्फ सोनू, यासीन निवासी पचार, मेहताब अंसारी निवासी लक्ष्मीपुर, गिरीश सिंह व दीपक सिंह निवासी रानीकाफ, बुन्ने सिंह निवासी थरूआडीह हाटा तथा किशन उर्फ कृष्णा निवासी झुगवां शामिल हैं।
जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार सभी निष्कासित व्यक्तियों को छह माह तक बिना न्यायालय की अनुमति जनपद कुशीनगर की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी। यदि वे जनपद सीमा के बाहर कहीं रात्रि विश्राम करेंगे तो इसकी सूचना संबंधित थाना प्रभारी को देना अनिवार्य होगा। न्यायालय में पेशी के लिए अलग से अनुमति लेने की बाध्यता नहीं होगी, लेकिन अन्य किसी भी कारण से जिले में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित थानाध्यक्षों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनपद में शांति भंग करने वाले तत्वों के खिलाफ इसी तरह की कठोर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
प्रशासन के इस कदम को लोग “कानून की सख्त दस्तक” बता रहे हैं। साफ संदेश है—अब कुशीनगर में गुंडागर्दी नहीं, कानून का राज
