
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर। मोतीचक विकास खंड में लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा कराए जा रहे सड़क और पुल निर्माण कार्यों में गंभीर अनियमितताएं उजागर हो रही हैं। करोड़ों रुपये की लागत वाले इन परियोजनाओं में विभाग द्वारा अनिवार्य सूचना पट्ट तक नहीं लगाए गए। बिना किसी सूचना के निर्माण कार्य शुरू, ठेकेदार मर्जी से काम और गुणवत्ता का पूर्ण अनदेखा—ऐसा दृश्य आम जनता के लिए चिंता का विषय बन गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह आंखें मूंदकर बैठे हैं और ठेकेदार अपनी सुविधा अनुसार घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनता की निगरानी पूरी तरह गायब है और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
बिना सूचना पट्ट, जनता के सवाल
मौजूदा समय में मोतीचक क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन स्थानों पर सड़क और पुल निर्माण चल रहे हैं। अधिकांश स्थलों पर विभागीय इंजीनियरों की उपस्थिति नगण्य है। परिणामस्वरूप ठेकेदार अपने तरीके से निर्माण करा रहे हैं और गुणवत्ता मानकों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

नगर पंचायत मथौली के वार्ड नंबर 16 लोहेपार में करीब एक किलोमीटर लंबी पीच सड़क का निर्माण जारी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित जेई केवल एक दिन निरीक्षण के लिए आए और उसके बाद विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी स्थल पर नजर नहीं आया। निर्माण स्थल पर तकनीकी निगरानी की कमी से सड़क की गुणवत्ता पर सीधे सवाल खड़े हो गए हैं।
इसी तरह मथौली से रगड़गंज मार्ग पर लक्ष्मीपुर माइनर पर बन रहे पुल में रेत और घटिया बालू का इस्तेमाल हो रहा है। वहीं मां चेड़ा देवी मंदिर के पास पचार में बन रहे माइनर पुल में निम्न स्तर की सरिया डालने का आरोप है। इन दोनों निर्माण स्थलों पर भी विभाग द्वारा कोई सूचना पट्ट नहीं लगाया गया, जो नियमों की खुली अवहेलना मानी जा रही है।
सड़कों की हालत और घटिया सामग्री
लोहेपार में बन रही पीच सड़क में घटिया गिट्टी और बजरी का इस्तेमाल किया गया है। सड़क किनारे भरी मिट्टी रोलर चलने के बाद दरकने लगी। सड़क के बीच मौजूद पोखरी में पानी निकासी के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में यह सड़क कुछ ही दिनों में ध्वस्त हो सकती है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि लाखों रुपये की इन परियोजनाओं में विभागीय मिलीभगत से भारी गोलमाल हो रहा है। ठेकेदार निर्माण कार्यों को जल्दबाजी में निपटाने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रामीण पीडब्ल्यूडी के उच्च अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मार्च क्लोजिंग और सरकारी बजट की जल्दबाजी
वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना मार्च सरकारी विभागों में बजट क्लोजिंग का समय होता है। जानकार बताते हैं कि मार्च क्लोजिंग में अक्सर बजट खपाने के लिए परियोजनाओं में तेजी लाई जाती है। मोतीचक क्षेत्र में एक साथ कई सड़क और पुल निर्माण इसी प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की जल्दबाजी से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित होती है और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ पैसे का खेल नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा का मुद्दा है।
पांच करोड़ की परियोजना में भी प्रशासन ने आंखें मूंद रखी
मोतीचक क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं पर सवाल उठते ही जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट के सामने बुद्धा पार्क में पांच करोड़ रुपये की लागत से कराए गए निर्माण कार्य भी याद आ गए।
इस परियोजना में व्यायामशाला, कार्यालय कक्ष, गोदाम, शौचालय और पाथ-वे का निर्माण हुआ। लेकिन यहां भी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे। मौके पर आवश्यक दस्तावेज जैसे सूचना पट्ट, स्वीकृत नक्शा, डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, साइट माप रजिस्टर, क्वालिटी कंट्रोल रजिस्टर, सामग्री परीक्षण रिपोर्ट, सामग्री खरीदारी रजिस्टर, साइट ऑर्डर बुक, विजिट रजिस्टर, ठेकेदार व सुपरवाइजर डिटेल रजिस्टर और कार्य कार्यक्रम/समय सारिणी उपलब्ध नहीं मिले।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इन अभिलेखों का अभाव न केवल पारदर्शिता बल्कि निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पांच करोड़ की इस परियोजना में अधिकांश समय निर्माण कार्य ठेकेदार के सुपरवाइजर के भरोसे चला, जबकि विभागीय इंजीनियरों की उपस्थिति बेहद कम रही।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और कटाक्ष
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ सरकारी नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि जनता की मेहनत की कमाई के साथ धोखा है। “ठेकेदार अपनी सुविधा अनुसार घटिया सामग्री डाल रहे हैं और अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह आंखें मूंदे बैठे हैं,” ग्रामीणों ने कहा।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा और मार्च क्लोजिंग के बहाने जल्दी-जल्दी काम निपटाने की कोशिश की जा रही है।
इन्फोग्राफिक-स्टाइल हाइलाइट बॉक्स: निर्माण में प्रमुख कमियां
बिना सूचना पट्ट निर्माण – जनता और अधिकारियों की निगरानी गायब
घटिया सामग्री – बजरी, गिट्टी, बालू और सरिया की शिकायत
तकनीकी निगरानी की कमी – जेई और इंजीनियरों की गैरमौजूदगी
पोखरी और पानी निकासी का इंतजाम नहीं – बरसात में सड़क ध्वस्त होने का खतरा
मार्च क्लोजिंग की जल्दबाजी – बजट खर्च करने के लिए गुणवत्ता की अनदेखी
दस्तावेजों का अभाव – सूचना पट्ट, नक्शा, DPR, माप रजिस्टर, क्वालिटी कंट्रोल रजिस्टर सभी गायब
जिम्मेदार अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह – प्रशासनिक लापरवाही और गोलमाल
निष्कर्ष: क्या सुधरेगा हाल?
मोतीचक क्षेत्र में हो रही गड़बड़ियों ने साफ कर दिया है कि विभागीय निगरानी और जिम्मेदारी अधूरी है। सवाल उठता है कि क्या लाखों रुपये की इन परियोजनाओं में अधिकारी धृतराष्ट्र की तरह आंखें मूंदे रहेंगे, या समय रहते जनता के पैसे और सुरक्षा की रक्षा करेंगे।
ग्रामीणों और जानकारों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। केवल दस्तावेजों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि जनता के भरोसे को भी खतरे में डाला जा रहा है।
