



16 मार्च, विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
कुशीनगर। प्रशासनिक कार्यों की सुस्ती पर परोक्ष कटाक्ष करते हुए गोरखपुर मंडल के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनगणना प्रशिक्षण, राजस्व वादों तथा शिकायत निस्तारण की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि देश और प्रदेश की विकास योजनाओं की नींव है, इसलिए इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जनगणना प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित कर्मियों को संबोधित करते हुए मंडलायुक्त ने कहा कि प्रगणकों को अपने दायित्व को पूरी गंभीरता से समझना होगा। जनगणना के दौरान घर-घर जाकर प्रत्येक परिवार की सही और पूर्ण जानकारी दर्ज करना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी परिवार का विवरण छूटना या गलत जानकारी दर्ज होना पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। साथ ही उन्होंने जनगणना से संबंधित सूचनाओं की गोपनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
मंडलायुक्त ने बताया कि जनगणना का कार्य दो चरणों में सम्पन्न होगा। पहले चरण में 22 मई 2026 से 20 जून 2026 तक मकानों का सूचीकरण एवं गणना की जाएगी। इससे पहले 7 मई से 21 मई 2026 तक नागरिकों को स्व-गणना पोर्टल के माध्यम से स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी। जबकि दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जिसे 28 फरवरी 2027 तक पूर्ण किया जाएगा।
इसके बाद मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी कार्यालय में उपजिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक), तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार के साथ बैठक कर राजस्व वादों की समीक्षा की। उन्होंने धारा 24, 34, 80 समेत लंबित मामलों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वर्षों से लंबित फाइलें प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि पुराने मामलों की सुनवाई कर इस माह के अंत तक अधिकतम वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और उपजिलाधिकारी प्रतिदिन न्यायालय कार्यवाही की निगरानी करें।
एसआईआर समीक्षा के दौरान उन्होंने बूथ स्तर पर कम फार्म भरने पर भी सख्ती दिखाई और संबंधित बीएलओ को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही सांसद, विधायक तथा अन्य विशिष्ट परिवारों के मतदाता नामों की भी जांच कर किसी का नाम छूटने न देने की हिदायत दी।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने शिकायत प्रकोष्ठ का भी जायजा लिया और आईजीआरएस पर लंबित शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता की शिकायतें फाइलों में दबने के लिए नहीं होतीं। मुख्यमंत्री संदर्भित शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निस्तारित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्ट्रेट परिसर के विभिन्न कार्यालयों के निरीक्षण में अभिलेखों की व्यवस्था पर भी उन्होंने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों में फाइलों की धूल नहीं, व्यवस्था और जवाबदेही दिखनी चाहिए। बैठक के दौरान जिलाधिकारी सहित सभी संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।











