
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | 26 मार्च 2026
जनपद में वाणिज्यिक एलपीजी आवंटन को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर जारी ताजा आदेशों ने साफ संकेत दे दिया है कि अब मनमानी, लापरवाही और अपारदर्शिता पर पूरी तरह लगाम कसी जाएगी। यह निर्देश उत्तर प्रदेश शासन और भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से प्राप्त आदेशों के अनुपालन में जारी किए गए हैं, जिनका पालन हर हाल में सुनिश्चित करना होगा।
प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था के तहत राज्यों को एलपीजी संकट से पहले की तुलना में मात्र 50 प्रतिशत वाणिज्यिक एलपीजी का आवंटन किया जाएगा। ऐसे में अब ‘पहले आओ-पहले पाओ’ की ढीली व्यवस्था नहीं, बल्कि प्राथमिकता आधारित सख्त वितरण लागू होगा। रेस्टोरेंट, ढाबा, होटल, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, डेयरी, सामुदायिक रसोई और प्रवासी श्रमिकों के लिए निर्धारित श्रेणियों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।
निर्देशों में दो टूक कहा गया है कि बिना पंजीकरण कोई भी वाणिज्यिक या औद्योगिक उपभोक्ता एलपीजी नहीं प्राप्त कर सकेगा। संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के साथ पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे हर उपभोक्ता की खपत पर निगरानी रखी जा सके। अब ‘जुगाड़’ और ‘सिफारिश’ के रास्ते सिलेंडर हासिल करने की पुरानी प्रवृत्ति पर सख्ती से रोक लगेगी।
इतना ही नहीं, सभी उपभोक्ताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित सिटी गैस वितरण इकाइयों के साथ पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना भी जरूरी कर दिया गया है। यानी प्रशासन अब एलपीजी पर निर्भरता कम करने और वैकल्पिक व्यवस्था को बढ़ावा देने के मूड में है।
जिलाधिकारी ने वर्ष 2025 तथा जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान वितरित किए गए एलपीजी सिलेंडरों का पूरा ब्यौरा तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश उन विक्रय अधिकारियों के लिए भी चेतावनी है, जो अब तक आंकड़ों के खेल में पारदर्शिता से बचते रहे हैं।
साफ है—अब जवाबदेही तय होगी, आंकड़े छुपाने वालों की खैर नहीं और नियमों से खिलवाड़ करने वालों पर सीधी कार्रवाई तय है। प्रशासन का संदेश स्पष्ट है: व्यवस्था सुधरेगी, या फिर सख्ती और बढ़ेगी।
