





विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | 27 मार्च | विशेष संवाददाता
कुशीनगर के विकास भवन सभागार में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान परिषद की “वित्तीय एवं प्रशासकीय विलंब समिति” की बैठक महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि सुस्त रफ्तार तंत्र पर करारा प्रहार बनकर सामने आई। मा० विधान परिषद सदस्य डॉ० रतन पाल सिंह की अध्यक्षता में हुई इस समीक्षा बैठक में विभागीय कार्यों की गति, बजट के उपयोग और जमीनी हकीकत पर तीखी नजर डाली गई।
सभापति ने दो टूक कहा—“सरकार की मंशा कागजों में नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए।” उन्होंने अधिकारियों को चेताते हुए स्पष्ट किया कि जनहित के मामलों में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं होगी। जिलाधिकारी के समन्वय से ठोस कार्ययोजना बनाकर योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया।
शिक्षा विभाग की समीक्षा में सुस्ती पर अप्रत्यक्ष नाराजगी झलकी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत धनराशि के पूर्ण उपयोग, नए सत्र में अधिकतम नामांकन, ड्रॉपआउट छात्रों की वापसी और विद्यालयों के कायाकल्प पर विशेष जोर दिया गया। साफ संकेत—“स्कूलों की तस्वीर बदलिए, वरना सवाल उठेंगे।”
स्वास्थ्य विभाग को आयुष्मान भारत योजना के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन का टारगेट दिया गया। गांव-गांव कैंप लगाकर आयुष्मान कार्ड बनाने के निर्देश दिए गए। हालांकि जिलाधिकारी के प्रयासों की सराहना कर उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया गया—यानी काम दिखे तो तारीफ भी तय है।
लोक निर्माण और विद्युत विभाग को चेतावनी भरे निर्देश मिले—सड़कें समय पर बनें, बिजली रोस्टर के अनुसार पहुंचे और चोरी पर सख्त कार्रवाई हो। प्राथमिक विद्यालयों के विद्युतीकरण में देरी पर भी अप्रत्यक्ष असंतोष दिखा।
पंचायती राज और नगर निकायों को संसाधनों के बेहतर उपयोग और राजस्व बढ़ाने के नए मॉडल अपनाने को कहा गया। वहीं पूर्ति विभाग को अफवाहों पर लगाम लगाने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक का सबसे कड़ा संदेश खनन विभाग के लिए रहा—अनुपस्थित अधिकारी पर 7 दिन में कार्रवाई और 15 दिन में रिपोर्ट देने का निर्देश। साफ है, अब “अनुपस्थिति” भी जवाबदेही से बचा नहीं पाएगी।
अंत में जिलाधिकारी ने सभी निर्देशों के अक्षरशः पालन का भरोसा दिलाया, लेकिन बैठक का लहजा यह साफ कर गया—अब कुशीनगर में काम नहीं, परिणाम की गिनती होगी।
