
कुशीनगर में अवैध खनन बेलगाम, जेसीबी गरजती रही—प्रशासन खामोश! कानून ठप, माफिया बेखौफ, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
कुशीनगर में अवैध मिट्टी खनन का खेल अब सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है। पडरौना कोतवाली क्षेत्र के कटनरवार पुल के पास जो कुछ हो रहा है, वह कानून-व्यवस्था के मुंह पर खुला तमाचा है। जेसीबी मशीनों की गरज के बीच मानो नियम-कानून दम तोड़ चुके हैं और जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में हैं।

बताया जा रहा है कि ‘लबरेज’ नामक ठेकेदार द्वारा बिना किसी वैध अनुमति के बड़े पैमाने पर मिट्टी खनन कराया जा रहा है। मौके पर दिन-रात जेसीबी मशीनें चल रही हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी संदिग्ध बना रही है। जब ठेकेदार से इस बाबत सवाल किया गया, तो उसका बेखौफ जवाब—“मिट्टी खनन के लिए किसी परमिशन की जरूरत नहीं”—सीधे-सीधे सिस्टम को चुनौती देता नजर आता है। सवाल यह है कि आखिर इतनी हिम्मत कहां से आ रही है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगातार हो रही खुदाई से नहर की पटरियां कमजोर हो रही हैं और आसपास की जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है। यानी यह अवैध कारोबार सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि भविष्य के किसी बड़े हादसे की पटकथा भी लिख रहा है। इसके बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—क्या सब कुछ जानकर भी अनदेखा किया जा रहा है?

मामला यहीं नहीं रुकता। इस पूरे खेल में पत्रकारों को फंसाने की साजिश भी सामने आई है। जेसीबी मालिक इश्तेयाक द्वारा एक पत्रकार से संपर्क कर उसका मोबाइल नंबर लिया गया और फिर खबर प्रसारित होते ही उसी नंबर से जुड़े खाते में 500 रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। इसके बाद उल्टा पत्रकार पर पैसे मांगने का आरोप लगाने की कोशिश की गई। यह न सिर्फ साजिश का संकेत है, बल्कि सच्चाई को दबाने की एक खतरनाक चाल भी है।
इतना ही नहीं, मौके पर कवरेज कर रहे पत्रकारों को डराने-धमकाने की कोशिश भी की गई। खुद को ‘अंसारी कंस्ट्रक्शन’ का मालिक बताने वाला लबरेज अंसारी ने लखनऊ के एक कथित पत्रकार “विशाल सिंह” से फोन पर बात कराकर दबाव बनाने की कोशिश की। बाद में जांच में सामने आया कि यह व्यक्ति कोई पत्रकार नहीं, बल्कि खुद एक ठेकेदार है, जो पत्रकार का चोला पहनकर अवैध खनन के इस खेल को संरक्षण दे रहा है।
अब सवाल सीधा है—क्या प्रशासन इस पूरे मामले में कार्रवाई करेगा या फिर जेसीबी की गड़गड़ाहट के आगे कानून यूं ही घुटने टेकता रहेगा? कुशीनगर की जनता जवाब चाहती है, और जवाब अब देना ही होगा।
