
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | संवाददाता अमित कुमार कुशवाहा की विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर जनपद के सेवरही थाना क्षेत्र अंतर्गत सिराज नगर स्थित ग्रीन लेन इंटरनेशनल स्कूल में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक करीब 25 बच्चों की तबीयत एक साथ बिगड़ गई। कक्षा में बैठे बच्चों को घबराहट, बेचैनी और सांस लेने में दिक्कत महसूस होते ही स्कूल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में सभी बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेवरही ले जाया गया।
सीएचसी पर तैनात डॉक्टरों ने तत्परता दिखाते हुए सभी बच्चों का प्राथमिक उपचार किया और राहत की बात यह रही कि सभी को स्वस्थ घोषित कर घर भेज दिया गया। लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या स्कूल प्रशासन बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त सजग है?
घटना की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर और पुलिस अधीक्षक केशव कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। प्राथमिक जांच में जो कारण सामने आया, वह और भी चौंकाने वाला है। बताया गया कि स्कूल के पास कूड़ा-कबाड़ और भांग के पौधों को जलाया जा रहा था, जिससे उठे जहरीले धुएं ने बच्चों की सेहत पर असर डाला।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया और आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को “पूरी तरह सामान्य” बताते हुए राहत की सांस ली, लेकिन सवाल यही है कि आखिर ऐसी लापरवाही की अनुमति किसने दी?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बच्चों को अस्पताल नहीं पहुंचाया जाता, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित हैं, लेकिन यह घटना स्कूलों के आसपास सफाई और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है।
स्थिति सामान्य जरूर है, मगर सिस्टम की सुस्ती पर यह घटना एक करारा तमाचा बनकर सामने आई है।




