


विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा थाना क्षेत्र अंतर्गत गौरी श्रीराम कोइरी टोला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक युवक ने दलित युवती को शादी का झांसा देकर लंबे समय तक उसका शारीरिक शोषण किया, मंदिर में शादी रचाई और फिर उसे अपनाने से साफ इनकार कर दिया। हैरानी की बात यह है कि पीड़िता पिछले एक सप्ताह से न्याय के लिए थाने का चक्कर काट रही है, लेकिन अब तक कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
पीड़िता और उसकी मां का आरोप है कि आरोपी युवक ने 5 मई को रामकोला स्थित एक मंदिर में युवती से शादी की थी। शादी के बाद युवती को भरोसा था कि अब उसे सामाजिक पहचान और सम्मान मिलेगा, लेकिन मंदिर की शादी कुछ ही दिनों में “धोखे की पटकथा” साबित हो गई। आरोप है कि शादी के बाद युवक ने युवती को अपने घर रखने से इनकार कर दिया और संबंध तोड़ने लगा।
बताया जा रहा है कि 7 मई को युवती के परिजनों ने उसकी दूसरी जगह शादी कर दी, लेकिन वहां भी विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि आरोपी युवक युवती को वहां से भगाकर ले आया, जिससे मामला और उलझ गया। अब पीड़िता का परिवार खुद को सामाजिक अपमान, मानसिक प्रताड़ना और प्रशासनिक उदासीनता के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका पर उठ रहा है। पीड़िता की मां ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाना पुलिस मामले को “पैसा लेकर मैनेज” करने में जुटी हुई है। उनका कहना है कि एक सप्ताह से लगातार गुहार लगाने के बावजूद न मुकदमा दर्ज हुआ और न ही आरोपी पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। आरोप यह भी है कि गरीब और दलित परिवार होने के कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही।
गांव में अब यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक दलित युवती को शादी और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में न्याय पाने के लिए थाने की चौखट घिसनी पड़े, तो महिला सुरक्षा और दलित संरक्षण के बड़े-बड़े दावे आखिर किस काम के हैं? क्या कानून सिर्फ कागजों तक सीमित होकर रह गया है?
मामले को लेकर क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज ने कहा है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पीड़िता का परिवार अब भी इंसाफ की उम्मीद में प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठा है।
