

विलेज फास्ट टाइम्स | विशेष संवाददाता | कुशीनगर
तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के सेवरही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत सरेया खुर्द में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा कराए जा रहे पुल निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन से बनाए जा रहे इस पुल में मानकों को दरकिनार कर घटिया और मिलावटी सामग्री का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य शुरू होते ही भ्रष्टाचार की बू आने लगी है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत निर्मित सड़क पर स्थित क्षतिग्रस्त पुल का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण स्थल पर गुणवत्ता की जगह समझौते का खेल चल रहा है। आरोप है कि सरिया, सीमेंट, बालू सहित अन्य निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं लगाई जा रही है।
मामला तब और गंभीर हो गया जब विरोध कर रहे ग्रामीणों के सामने ठेकेदार के प्रतिनिधि ने कथित रूप से ऐसा बयान दिया जिसने पूरे विभागीय सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। प्रतिनिधि ने कहा कि “सिस्टम के अनुसार ही काम करना पड़ता है और इस सिस्टम में अभियंताओं से लेकर उच्च अधिकारियों तक का हिस्सा होता है।”
यदि यह कथन सत्य है तो सवाल उठता है कि आखिर वह कौन सा सिस्टम है जो सरकारी नियमों और गुणवत्ता मानकों से भी ऊपर है? क्या सरकारी परियोजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने का कोई समानांतर तंत्र काम कर रहा है?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाएं केवल कागजों में ही गुणवत्तापूर्ण दिखाई देंगी, जबकि धरातल पर जनता को जर्जर और असुरक्षित निर्माण झेलना पड़ेगा।
अब निगाहें लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्या विभाग निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा और पुल का निर्माण मानकों के अनुरूप दोबारा कराया जाएगा, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत के चलते बिना जांच के भुगतान कर पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया जाएगा?
फिलहाल सरेया खुर्द का यह पुल निर्माण कार्य ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग जवाब मांग रहे हैं कि आखिर सरकारी धन से बन रही परियोजनाओं में गुणवत्ता से खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा।
