
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर में बिजली विभाग से जुड़ी कम्प्यूटर ऑपरेटरों की नियुक्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिले में चर्चा का बाजार गर्म है कि यहां नौकरी पाने के लिए योग्यता, अनुभव या मेरिट नहीं, बल्कि मोटी रकम ही सबसे बड़ी पात्रता बन गई। आरोप हैं कि आउटसोर्सिंग कम्पनी के माध्यम से चुपचाप नियुक्तियां कर दी गईं और पूरे जिले के बेरोजगार युवाओं को इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई।
सबसे हैरान करने वाली बात यह बताई जा रही है कि भर्ती के लिए न कोई सार्वजनिक विज्ञापन जारी हुआ, न आवेदन मांगे गए, न इंटरव्यू हुआ और न ही किसी प्रकार की मेरिट सूची प्रकाशित की गई। इसके बावजूद दर्जनों अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल गए। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इन नौकरियों का बंटवारा किस आधार पर हुआ?
सूत्रों के मुताबिक केवल पडरौना विद्युत उपकेंद्र पर ही लगभग 17 कम्प्यूटर ऑपरेटरों की तैनाती की गई है। आरोप यह भी है कि नियुक्ति के बदले अभ्यर्थियों से डेढ़ लाख से दो लाख रुपये तक की रकम वसूली गई। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो केवल एक उपकेंद्र पर ही लाखों रुपये के लेन-देन का मामला सामने आ सकता है। जिले के अन्य विद्युत उपकेंद्रों में भी इसी तरह की नियुक्तियों की चर्चाएं जोरों पर हैं।
मामले ने इसलिए भी गंभीर रूप ले लिया है क्योंकि पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गोपनीयता का पर्दा पड़ा हुआ दिखाई देता है। जिले के हजारों बेरोजगार युवा यह जानना चाहते हैं कि आवेदन कब मांगे गए, चयन की प्रक्रिया क्या थी, पात्रता का निर्धारण कैसे हुआ और चयन समिति में कौन-कौन लोग शामिल थे। इन सवालों का स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आया है।
भर्ती प्रक्रिया से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी आउटसोर्सिंग कम्पनी को नियुक्तियों के दौरान निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन करना होता है। रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक करना, आवेदन आमंत्रित करना, पात्र अभ्यर्थियों का परीक्षण करना और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाना सामान्य नियम हैं। लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है।
बेरोजगारी के दौर में सरकारी विभागों से जुड़ी नौकरियां युवाओं के लिए उम्मीद की किरण होती हैं। ऐसे में यदि नौकरी पाने के लिए कथित रूप से बोली लगानी पड़े तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब निगाहें बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो भर्ती के नाम पर चल रहे कथित खेल की परतें खुल सकती हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या कुशीनगर में बिजली विभाग की नौकरियां अब योग्यता और मेहनत से नहीं, बल्कि पैसों की ताकत से तय की जा रही हैं? जनता जवाब चाहती है और व्यवस्था से पारदर्शिता की मांग कर रही है।
