

📰 विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
कुशीनगर, 1 नवम्बर।
जनपद कुशीनगर के दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर शुक्रवार को स्वास्थ्य व्यवस्था की असली कड़ी कही जाने वाली आशा बहुएं अपने हक़ की आवाज़ बुलंद करने सड़कों पर उतर आईं। वर्षों से कम वेतन और अनदेखी का दर्द झेल रहीं इन महिलाओं ने सीएचसी प्रभारी अमित राय को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उनका मुख्य उद्देश्य था — वेतन वृद्धि और स्थायी मानदेय की मांग।
आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि सरकार उन्हें “स्वास्थ्य सेवा की रीढ़” कहती है, लेकिन जब अधिकार और सम्मान देने की बात आती है तो सब मौन हो जाते हैं। एक आशा बहू ने भावुक होकर कहा, “हम दिन-रात गर्भवती महिलाओं की सेवा करते हैं, टीकाकरण और जनस्वास्थ्य योजनाओं में अपनी जान लगा देते हैं, लेकिन हमें इतना वेतन नहीं मिलता कि घर का खर्च भी चल सके।”
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उनकी समस्याओं को वर्षों से केवल कागजों में सुलझाते रहे हैं। “जब तक सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा,” प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने भी इनकी आवाज़ को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब पूरा सिस्टम घरों में था, तब यही आशा बहुएं गांव-गांव जाकर लोगों की जान बचा रही थीं। आज वही महिलाएं अपने अधिकार के लिए धरने पर बैठी हैं — यह सरकार की संवेदनहीनता और तंत्र की विफलता को उजागर करता है।
विरोध के दौरान आशा बहुओं ने कहा कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन करेंगी। प्रशासन की चुप्पी और सरकार की उपेक्षा अब जनाक्रोश में बदलती दिख रही है।
विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर के लिए विशेष रिपोर्ट।
