

📰 विलेज फास्ट टाइम्स – कुशीनगर
दिनांक – 02 नवम्बर 2025
“योगी सरकार का सख्त एक्शन! ग्रामसभा की ज़मीन पर कब्ज़ा करने वाले हों सावधान — फर्जी रिपोर्ट, भ्रष्टाचार और लापरवाही पर अब गिरेगी गाज! जनता बोले — अब नतीजा चाहिए!”
कुशीनगर जनपद की ग्रामसभा कुबेरा भुआलपट्टी में सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़े और लेखपालों की फर्जी आख्या रिपोर्ट ने एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी पत्र में निर्देश दिए हैं कि जनता दर्शन और जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण अधिकारी स्वयं स्थलीय निरीक्षण के बाद करें, न कि केवल कागज़ी रिपोर्ट बनाकर औपचारिकता निभाएं।
⚖️ ग्रामसभा भूमि पर कब्ज़ा — भ्रष्टाचार की खुली मिसाल
कुबेरा भुआलपट्टी की गाटा संख्या 32/34 राजस्व अभिलेखों में “नवीन परती भूमि” के रूप में दर्ज है। लेकिन स्थानीय सूत्रों के अनुसार कुछ प्रभावशाली लोगों ने इस जमीन पर कब्ज़ा कर लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि लेखपाल ने फर्जी रिपोर्ट बनाकर यह दिखाया कि 11 लोगों को पट्टा मिला है और वे अपने हिस्से की ज़मीन पर काबिज हैं, जबकि सच्चाई इसके उलट है। धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय का कहना है — “लेखपाल और कुछ अफसरों की मिलीभगत से गरीबों की जमीन पर कब्जा कराया जा रहा है।”
⚔️ राजस्व संहिता की धारा 67 और 122-बी का खुला उल्लंघन
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 ग्रामसभा भूमि पर कब्जा करने को दंडनीय अपराध घोषित करती है, जबकि धारा 122-बी उपजिलाधिकारी को ऐसे अवैध कब्जों को हटाने, जुर्माना लगाने और गिरफ्तारी की शक्ति देती है। परंतु कुबेरा भुआलपट्टी में ये दोनों धाराएँ “किताबों तक सीमित” रह गई हैं।
🏛️ उच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कई आदेशों में कहा है कि ग्रामसभा भूमि पर अवैध कब्ज़ा या पट्टा वितरण “कानूनन अमान्य” है। कोर्ट ने अफसरों को आदेशित किया था कि हर हाल में ग्राम समाज की भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। परंतु तहसील तमकुहीराज में यह आदेश भी फाइलों में धूल फाँक रहे हैं।
🔥 मुख्यमंत्री का आदेश — “भ्रष्टाचारियों की अब खैर नहीं”
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा —
“जो अधिकारी जनता को गलत रिपोर्ट देकर गुमराह करेंगे, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जनहित के मामलों में कोई लापरवाही नहीं चलेगी।”
इस निर्देश के बाद मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और तहसीलदारों को आदेशित किया गया है कि वे स्वयं जांच कर जनता को न्याय दिलाएं।
🗣️ जनता की आवाज़ — “आदेश तो सख्त हैं, पर कार्रवाई कब?”
ग्रामसभा के निवासी धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा —
“मुख्यमंत्री की नीयत साफ़ है, लेकिन नीचे के अफसरों की सुस्ती और भ्रष्टाचार के कारण जनता को राहत नहीं मिल पा रही। जमीन पर उतरने की ज़रूरत अब सरकार को है।”
📰 विलेज फास्ट टाइम्स की राय
राजस्व विभाग का यह रवैया जनता के विश्वास से खिलवाड़ है। जब ग्रामसभा की ज़मीन — जो गरीबों के हक़ की होती है — पर कब्ज़ा हो जाए और अधिकारी आँख मूँद लें, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि प्रणाली की नाकामी है।
अब जनता पूछ रही है —
“क्या कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है, या अब सच में कानून का राज दिखेगा?”
