
03 दिसम्बर – विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
कुशीनगर जनपद में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की आशंकाओं को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तेजी के साथ वृहद निरोधात्मक अभियान चलाता हुआ नजर आ रहा है। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देशन में स्वास्थ्य विभाग, पंचायत विभाग और प्रशासनिक अमला मिलकर गाँव–गाँव में एहतियाती कदमों को जमीन पर उतारने में जुटा है।
डीएम ने बताया कि प्रभावित गांवों में तत्काल मेडिकल कैम्प लगाए गए, जहां बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड सहित अन्य संक्रमणों की रैपिड किट से जांच की गई। स्वास्थ्य टीमें घर–घर जाकर बच्चों की जांच कर रही हैं और जिनमें बुखार के लक्षण मिले, उनका मौके पर ही इलाज शुरू कर दिया गया है।
इसी क्रम में डीएम ने स्वयं ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर जनपद स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने–अपने विभाग से सम्बन्धित सभी निरोधात्मक कार्यों को युद्धस्तर पर लागू किया जाए। स्वास्थ्य टीमों द्वारा लगातार सर्वे जारी है और लोगों को रोगों से बचाव के उपाय भी बताए जा रहे हैं।
19 गाँव, 3750 घरों का सर्वे – कुएं, नालियों, झाड़ियों से लेकर गलियों तक सफाई का विशेष अभियान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा अब तक 19 गांवों के 3750 घरों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। वहीं ग्रामीण इलाकों में साफ-सफाई और संक्रमण रोकथाम के लिए पंचायत विभाग ने 980 ग्राम पंचायतों में 1627 सफाईकर्मियों को मैदान में उतारा है।
इन्हें सफाई, एंटी-लार्वा छिड़काव, फॉगिंग, झाड़ियों की कटाई, नालियों की सफाई और जलभराव वाले स्थानों के निस्तारण जैसे कार्यों में लगाया गया है। इसके अतिरिक्त हर ग्राम पंचायत में वित्त आयोग की टाइड ग्रांट से 25–25 मजदूर, ट्रैक्टर–ट्रॉली, जेसीबी मशीनें आदि लगाकर अभियान को और मजबूत किया गया है।
ग्राम स्तरीय निगरानी समितियाँ सक्रिय, घर-घर जागरूकता—क्या करें, क्या न करें की पम्पलेटिंग शुरू
लेप्टोस्पायरोसिस जैसी ज़ूनोटिक बीमारी से निपटने के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायत स्तरीय निगरानी समितियाँ गठित कर दी हैं, जो निरंतर अपने क्षेत्रों में निगरानी कर रही हैं। इन्हें विशेष रूप से क्या करें / क्या न करें से संबंधित पम्पलेट उपलब्ध कराए गए हैं ताकि लोगों को सही जानकारी मिल सके और भ्रम या अफवाह की स्थिति न बने।
प्रभावित ग्राम पंचायतों में पेयजल की सैंपलिंग कराई गई, जिसकी रिपोर्ट ‘सामान्य’ पाई गई है। साथ ही छिछले (शैलो) हैंडपंपों पर लाल रंग से क्रॉस (×) का निशान लगाकर उन्हें उपयोग से बचने की चेतावनी दी गई है।
ग्रामीण इलाकों में फैले चूहों और अन्य वाहक जीवों को नियंत्रित करने के लिए रैट-होल में जिंक फास्फाइड दवा डालने का अभियान भी शुरू किया गया है। प्रशासन ने सभी ग्राम प्रधानों से समन्वय बनाकर बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाने का अनुरोध किया है।
लेप्टोस्पायरोसिस: क्या है, कैसे फैलता है — प्रशासन ने जारी की विशेष चेतावनी
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से Leptospira बैक्टीरिया से होता है। यह जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी है। विशेषकर चूहों, सूअरों और कुत्तों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
प्रशासन ने दो टूक कहा है कि सामान्य बुखार, सर्दी–जुकाम या फ्लू को लेप्टोस्पायरोसिस समझना गलत और भ्रामक है। ऐसी अफवाहों से ग्रामीणों में पैनिक की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए हर व्यक्ति जानकारी की पुष्टि करके ही कोई बात साझा करे।
जिला प्रशासन की आम जनता से अपील – “अफवाहों से दूर रहें, सफाई ही सुरक्षा है”
जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि अफवाह फैलाने वालों से सावधान रहें। प्रशासन ने कहा कि दोनों प्रभावति गांवों में हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।
साथ ही घरों, आंगनों, नालियों और आसपास की जगहों पर पूर्ण स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी गई है। पानी का ठहराव न होने दें, बच्चों को गंदे पानी में खेलने से रोकें और किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य टीम या चिकित्सक से संपर्क करें।
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की यह संयुक्त कार्रवाई ग्रामीण क्षेत्रों में राहत और भरोसा पैदा कर रही है। निरंतर सर्वे, सफाई और जागरूकता कार्यक्रमों से उम्मीद है कि संक्रमण की आशंका पर जल्द ही पूरी तरह काबू पाया जा सकेगा।






