

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के दुदही विकास खंड अंतर्गत ग्राम सभा बतरौली धुरखड़वा में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जिस भूमि पर ग्रामीणों के अनुसार उनके पुरखे 60 से 70 वर्षों से बसे हुए हैं, उसी जमीन से बेदखल करने के लिए चस्पा किए गए नोटिस ने पूरे गांव में भय और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी भूमि के नाम पर चुनिंदा परिवारों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि उसी भूमि पर गांव के अधिकांश लोग वर्षों से मकान बनाकर रह रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि यदि भूमि वास्तव में अवैध कब्जे में है तो कार्रवाई कुछ घरों तक ही सीमित क्यों? क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है?
पीड़ित परिवारों का कहना है कि हल्का लेखपाल लगातार मकान खाली करने का दबाव बना रहा है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने नोटिस की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका दावा है कि नोटिस पर न तो तहसीलदार के हस्ताक्षर हैं और न ही एसडीएम की मुहर। ऐसे में ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर यह प्रशासनिक आदेश है या किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत पहल?
विवादित भूखंड संख्या 591 राजस्व अभिलेखों में रास्ते की भूमि दर्ज है, लेकिन मौके पर दशकों से आबादी बस चुकी है। मकान, हैंडपंप, पशुओं के नांद-खूंटे और पुराने पेड़ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यहां जीवन की जड़ें कई पीढ़ियों से फैली हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन पर कभी रास्ता दिखाई नहीं दिया, आज अचानक उसे रास्ता बताकर बेदखली की तलवार लटका दी गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, नोटिस की वैधता की पड़ताल और कथित पक्षपातपूर्ण कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दशकों से बसे गरीब परिवारों को न्याय मिलेगा या फिर सरकारी फाइलों के पन्नों में उनकी जिंदगी उजड़ जाएगी? पूरे मामले पर प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही सच्चाई की तस्वीर साफ हो सकेगी।
