

“ब्राह्मणों को अपमानित कर राजनीति चमकाने वालों को जनता देगी जवाब!”
राजकुमार भाटी के बयान पर भड़के कुलदीप पाण्डेय, अखिलेश यादव से मांगा निष्कासन
“समाज तोड़ने वालों के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी पार्टी”
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर
गोरखपुर न्यूज़ नेटवर्क से विशेष संवाददाता
गोरखपुर। प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाज़ी का स्तर लगातार गिरता दिखाई दे रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी द्वारा ब्राह्मण समाज को लेकर की गई कथित अभद्र टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नया तूफान खड़ा कर दिया है। इस बयान को लेकर ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश देखा जा रहा है, वहीं विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी इसे समाज को बांटने वाली मानसिकता करार दिया है। इसी बीच राष्ट्रीय सर्व जनकल्याण संकल्प पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला है।
कुलदीप पाण्डेय ने राजकुमार भाटी के बयान को “सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का राजनीतिक हथकंडा” बताते हुए कहा कि ब्राह्मण समाज पर अभद्र टिप्पणी करना केवल एक जाति का अपमान नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और सामाजिक मूल्यों का अपमान है। उन्होंने कहा कि कुछ नेता आजकल सुर्खियों में आने के लिए समाजों के बीच जहर घोलने का काम कर रहे हैं। लेकिन अब जनता समझ चुकी है कि कौन समाज को जोड़ने की राजनीति कर रहा है और कौन समाज को तोड़कर अपनी दुकान चलाना चाहता है।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज ने सदियों से देश को दिशा देने का काम किया है। शिक्षा, साहित्य, धर्म, स्वतंत्रता संग्राम, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण में ब्राह्मण समाज की भूमिका हमेशा अग्रणी रही है। ऐसे समाज को अपमानित करके कोई भी नेता खुद को बड़ा नहीं बना सकता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “जो लोग अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए समाजों को लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें शायद यह नहीं पता कि जनता अब जातीय नफरत की राजनीति से ऊब चुकी है।”
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पार्टी अपने प्रवक्ताओं और नेताओं की इस प्रकार की बयानबाज़ी पर कार्रवाई नहीं करती, तो इसका सीधा अर्थ होगा कि पार्टी अंदरखाने ऐसी सोच को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी वास्तव में सामाजिक न्याय और भाईचारे की राजनीति करती है, तो उसे तत्काल राजकुमार भाटी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। केवल बयान जारी कर मामले को दबाने की कोशिश करना पर्याप्त नहीं होगा।
कुलदीप पाण्डेय ने तीखे शब्दों में कहा कि “राजनीति सेवा का माध्यम होनी चाहिए, समाजों के बीच दीवार खड़ी करने का औजार नहीं।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल चुनाव आते ही जातीय समीकरणों की आग भड़काकर अपने वोट बैंक को मजबूत करने में जुट जाते हैं। लेकिन अब देश का युवा जाग चुका है और वह विकास, रोजगार, शिक्षा और सामाजिक एकता की बात सुनना चाहता है, न कि जातीय वैमनस्य फैलाने वाली बयानबाज़ी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सर्व जनकल्याण संकल्प पार्टी हमेशा “सबका सम्मान-सबका अधिकार” की नीति पर काम करती रही है। पार्टी किसी भी समाज, वर्ग या समुदाय के सम्मान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि किसी भी नेता द्वारा किसी जाति, धर्म या समाज के खिलाफ अपमानजनक बयान दिया जाता है, तो पार्टी उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी।
कुलदीप पाण्डेय ने राजकुमार भाटी से सार्वजनिक रूप से ब्राह्मण समाज से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि गलती करने वाला व्यक्ति छोटा नहीं होता, लेकिन गलती स्वीकार न करने वाला जरूर समाज की नजरों में गिर जाता है। उन्होंने कहा कि यदि भाटी अपने बयान पर माफी नहीं मांगते और समाजवादी पार्टी भी उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, तो राष्ट्रीय सर्व जनकल्याण संकल्प पार्टी प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाएगी। साथ ही जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे समाज को बांटने वाली राजनीति से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और सामाजिक समरसता में है। यहां हर समाज का अपना योगदान है और हर वर्ग का सम्मान होना चाहिए। किसी भी समाज को अपमानित कर राजनीति करने वालों को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयानों पर पहले भी कई बार राजनीतिक विवाद खड़े होते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेता दिखाई दे रहा है। विभिन्न संगठनों द्वारा विरोध की तैयारी और सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिक्रियाएं यह संकेत दे रही हैं कि यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति अब मुद्दों से भटककर केवल समाजों को बांटने की प्रतिस्पर्धा बनती जा रही है? क्या नेताओं की बयानबाज़ी पर राजनीतिक दलों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? जनता अब ऐसे सवालों के जवाब चाहती है। क्योंकि लोकतंत्र में शब्द केवल बयान नहीं होते, वे समाज की दिशा भी तय करते हैं।
कुलदीप पाण्डेय ने अंत में कहा कि देश को नफरत नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारा और समानता की राजनीति की जरूरत है। सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को ऐसे बयानों से बचना चाहिए जो समाज में तनाव और विभाजन पैदा करें। उन्होंने कहा कि “जो लोग समाज को तोड़ने की कोशिश करेंगे, जनता लोकतंत्र की ताकत से उन्हें जवाब देना जानती है।”
